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पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को दिया पेपर-मैशे उपहार, कला को वैश्विक पहचान मिलने पर कश्मीरी कारीगरों ने जताया आभार

पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को दिया पेपर-मैशे उपहार, कला को वैश्विक पहचान मिलने पर कश्मीरी कारीगरों ने जताया आभार
पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को दिया पेपर-मैशे उपहार, कला को वैश्विक पहचान मिलने पर कश्मीरी कारीगरों ने जताया आभार

श्रीनगर, 14 जुलाई (आईएएनएस)। कश्मीर की दुनिया भर में मशहूर पेपर-मैशे कला से जुड़े कारीगरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कदम का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने हालिया विदेश दौरे में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को पारंपरिक पेपर-मैशे का कटोरा भेंट किया। कारीगरों ने इसे घाटी के हस्तशिल्प उद्योग के लिए गर्व का क्षण बताया है।

पेपर-मैशे कलाकार बशारत हुसैन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से ​​बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह कदम कश्मीरी हस्तशिल्प के प्रति उनकी सराहना को दर्शाता है और इसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस क्षेत्र की समृद्ध कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करने में मदद की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहचान से वैश्विक मांग बढ़ेगी और स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर मिलेंगे।

कारीगर बशारत हुसैन ने कहा, "पेपर-मैशे एक बहुत पुरानी कला है जो यहां फारस से आई थी, और हमने इसे लगभग 500-600 साल पहले अपनाया था। तब से, हम यहां इस कला को अपनाए हुए हैं। मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत खुशी है कि प्रधानमंत्री ने इसे उपहार के तौर पर चुना। इससे इस कला को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकती है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पेपर-मैशे के बॉक्‍स को चुनकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को उपहार स्‍वरूप भेंट किया, तो इसका वैश्विक मंच पर फर्क जरूर पड़ता है।"

उन्‍होंने कहा कि इससे पता चलता है कि भारत का नेतृत्‍व करने वाले प्रधानमंत्री अपने देश की कला को बचाने के लिए कितने गंभीर हैं। पेपर-मैशे एक अंतरराष्‍ट्रीय ब्रांड बन चुका है। ये चीजें बूस्‍ट करने में अहम भूमिका अदा करती हैं। क्राफ्ट को इंटरनेशनल पहचान मिलना बड़ी बात है।

कारीगर बशारत हुसैन ने बताया, "अगर हम यहां के मौजूदा हालात की बात करें तो इसे काफी हद तक कम आंका जाने लगा है। एक समय था जब अर्थव्यवस्था में इसकी बहुत अहम भूमिका थी, सिर्फ पेपर-मैशे ही नहीं, बल्कि कई अन्य कलाएं भी हैं। कारपेट इंडस्‍ट्री की अगर मैं मौजूदा स्थिति की बात करूं तो कहूंगा कि इसे बड़ा झटका लगा है। इसे फिर से जीवित करने और संरक्षित करने की जरूरत है। सरकार इसके लिए पहल कर रही है, शायद दिक्‍कत कहीं और से आ रही है।"

उन्‍होंने कहा कि पेपर-मैशे के स्‍थानीय स्‍तर पर इस्‍तेमाल से अभी इसकी पहचान बनी हुई है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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