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पीएम मोदी का विपक्ष पर वार, 'सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर नए भारत की इच्छा शक्ति और प्रयास पड़े भारी'

पीएम मोदी का विपक्ष पर वार, 'सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर नए भारत की इच्छा शक्ति और प्रयास पड़े भारी'
पीएम मोदी का विपक्ष पर वार, 'सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर नए भारत की इच्छा शक्ति और प्रयास पड़े भारी'

जयपुर, 4 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के बालोतरा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छा शक्ति और भारत के प्रयास भारी पड़े हैं। इस दौरान, पीएम मोदी ने विरोधी दलों पर भी तीखा प्रहार किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। इस युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। बड़े-बड़े देश आज ईंधन की किल्लत से जूझ रहे हैं, लेकिन 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट पर 21वीं सदी के नए भारत की इच्छा शक्ति और भारत के प्रयास भारी पड़े हैं।"

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने हर स्तर पर सही फैसले लिए, संकट का समय रहते सटीक आकलन किया, प्रभावी रणनीति बनाई, भारत के संसाधनों का संतुलित प्रयोग किया, भारत की कूटनीतिक शक्ति का सकारात्मक इस्तेमाल किया और तब जाकर भारत संकट से उबर पाया है।

इस दौरान, इशारों-इशारों में विपक्ष पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, "सार्वजनिक तौर पर कुछ ताकतें अफवाह और आशंका फैलाने में व्यस्त थीं।" उन्होंने कहा, "तब किस स्तर पर दिन-रात काम हो रहा था, किस तरह स्थिति को संभाला जा रहा था, वो मेहनत, प्रयास और धैर्य के अलावा नीतिगत व कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए एक-एक संवेदनशील कदम कभी न कभी इतिहास लिखेंगे। ये सब अभूतपूर्व है।"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "हम सब जानते हैं, हमारी आवश्यकताओं की करीब 60 प्रतिशत एलपीजी अन्य देशों से आयात की जाती हैं। इसमें से भी 90 प्रतिशत एलपीजी खाड़ी देशों से आ रही थीं, होर्मुज से होकर आ रही थीं। अचानक से युद्ध के हालातों ने उस आपूर्ति को लगभग बंद कर दिया। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे देश में कितना बड़ा हाहाकार मचने जा रहा था, लेकिन राजस्थान की इस धरती ने हमें चुनौतियों को भी चैलेंज देना सिखाया है।"

उन्होंने कहा, "इसलिए, हमने संकट शुरू होते ही रिफाइनरी के सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया। औद्योगिक काम के लिए जो गैस बनती थी, उसकी रिफाइनरी को एलपीजी बनाने के लिए कहा गया और सात दिनों के भीतर एलपीजी के उत्पादन पर बढ़ोतरी हुई। पहले जो 35 हजार मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन देश में होता था, संकट के दौरान वह 54 हजार मीट्रिक टन तक बढ़ गया।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन रिफाइनरी ने पहले कभी एलपीजी नहीं बनाया था, उन्हें भी इसके लिए आकार दिया गया। रसोई गैस की मांग का पूरा भार एलपीजी पर न पड़े, सरकार ने इसका भी ध्यान रखा। पीएनजी के लिए अभियान चलाया गया। बहुत ही कम समय में भारत ने करीब 11 लाख से ज्यादा घरों को गैस के पीएनजी कनेक्शन से जोड़ दिया। हमने एक और आपूर्ति को सुनिश्चित किया। दूसरी ओर घरेलू उपभोक्ताओं पर बहुत बोझ भी नहीं पड़ने दिया।"

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, "जो हालात थे, उनमें घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत 2 हजार तक जा सकती थी। बड़े-बड़े मार्केट एक्सपर्ट यही आकलन कर रहे थे, लेकिन हमारे यहां अभी भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर 950 रुपए से भी कम में दिया जा रहा है। गरीबों को उज्जवला सिलेंडर 650 रुपए से भी कम पड़ रहा है। अब से दो दिन पहले सरकार ने कमर्शियल गैस की कीमतों में भी बहुत बड़ी कटौती कर दी है। ये दिखाता है कि हमारी सरकार कितनी संवेदनशीलता से काम कर रही है।"

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा में लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में पेट्रोकेमिकल्स, शहरी परिवहन, रेलवे, सड़कें, रिन्यूएबल एनर्जी और बिजली ट्रांसमिशन जैसे कई सेक्टर शामिल हैं।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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