पीएम मोदी स्लोवाकिया पहुंचे, वीडियो में जाने ऐतिहासिक दौरे में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से करेंगे मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो देशों के दौरे के दूसरे चरण के तहत रविवार देर रात करीब 2 बजे स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे। यह यात्रा भारत और स्लोवाकिया के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी 16 जून तक स्लोवाकिया में रहेंगे और इस दौरान कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।ब्रातिस्लावा एयरपोर्ट पर स्लोवाकिया के विदेश और यूरोपीय मामलों के मंत्री जुराय ब्लानार ने प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक स्लोवाक रीति के अनुसार उन्हें ब्रेड और नमक भेंट किया गया, जिसे वहां सम्मान, आतिथ्य और सद्भावना का प्रतीक माना जाता है। यह स्वागत समारोह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों की गर्मजोशी को दर्शाता है।
एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। प्रवासी भारतीयों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और “भारत माता की जय” के नारों से माहौल गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने भी उनसे बातचीत की और भारत से जुड़े उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली।यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि स्लोवाकिया वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बना था और उसके 33 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री आधिकारिक यात्रा पर वहां पहुंचे हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी अपने इस दौरे के दौरान स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और स्लोवाकिया के बीच इस उच्चस्तरीय संवाद से यूरोपीय संघ के भीतर भारत की साझेदारी और मजबूत होगी। साथ ही, रक्षा, विनिर्माण और आईटी सेक्टर में सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘ग्लोबल डिप्लोमेसी’ नीति के तहत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक और कदम है।

