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पिछले चार सत्रों में सेंसेक्स 3,000 अंक टूटा, निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपए डूबे; जानिए बाजार में भारी गिरावट की बड़ी वजहें

मुंबई, 12 मई (आईएएनएस)। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट देखने को मिली। दिन के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। सेंसेक्स सत्र के दौरान 1,100 अंक से ज्यादा टूटकर 74,894.39 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, वहीं निफ्टी भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 23,493.45 के इंट्रा-डे लो पर आ गया।
पिछले चार सत्रों में सेंसेक्स 3,000 अंक टूटा, निवेशकों के 13 लाख करोड़ रुपए डूबे; जानिए बाजार में भारी गिरावट की बड़ी वजहें

मुंबई, 12 मई (आईएएनएस)। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट देखने को मिली। दिन के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। सेंसेक्स सत्र के दौरान 1,100 अंक से ज्यादा टूटकर 74,894.39 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, वहीं निफ्टी भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 23,493.45 के इंट्रा-डे लो पर आ गया।

पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3,000 अंकों से ज्यादा यानी करीब 4 प्रतिशत टूट चुका है। वहीं, निफ्टी में भी 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में आई इस कमजोरी के चलते निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट आई और बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 13 लाख करोड़ घट गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर कुछ सेक्टरों के शेयरों पर साफ दिखाई दिया। प्रधानमंत्री ने हाल ही में लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस का सीमित उपयोग करने और एक साल तक सोने की खरीदारी टालने की सलाह दी थी।

इस बयान के बाद ज्वेलरी, ट्रैवल और होटल सेक्टर के शेयरों में बिकवाली बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि उपभोग में कमी आती है तो इन सेक्टरों की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आती है तो इन सेक्टरों में फिर सुधार देखा जा सकता है।

वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। युद्धविराम और बातचीत की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता नहीं हो पाया है।

इस अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे महंगाई बढ़ने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका बनी हुई है। निवेशकों का भरोसा कमजोर होने से बाजार में हर तेजी के बाद मुनाफावसूली बढ़ रही है।

वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमतें पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है।

महंगे कच्चे तेल से सरकार का वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है, महंगाई बढ़ सकती है, और आर्थिक विकास की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, इससे रुपए पर भी दबाव बढ़ता है और कंपनियों की लागत में इजाफा होता है।

भारतीय रुपया भी लगातार कमजोर हो रहा है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 35 पैसे टूटकर 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।

साल की शुरुआत में रुपया करीब 90 प्रति डॉलर के आसपास था, लेकिन अब इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। रुपए की कमजोरी से विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है, जिससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले साल जुलाई से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए निकाल चुके हैं।

सिर्फ मई में ही विदेशी निवेशकों ने करीब 19,500 करोड़ रुपए के शेयर बेच दिए हैं। लगातार हो रही इस बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है।

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी उभरते बाजारों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड लगातार बढ़ रही है, जिससे विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची तेल कीमतें और डॉलर की मजबूती आने वाले समय में वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि निवेशकों में फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो भारतीय बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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