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पेट की समस्याओं और तनाव से मुक्ति दिलाएगा यह योगासन

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की आधुनिक जीवनशैली में रीढ़ की हड्डी का लचीलापन और पाचन तंत्र का स्वस्थ होना एक बड़ी चुनौती बन गया है। 'मारीच्यासन' इन्हीं में से एक प्रभावशाली आसन है, जो न केवल रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है, बल्कि शरीर के आंतरिक अंगों की गहराई से डिटॉक्स करने में मदद करता है।
पेट की समस्याओं और तनाव से मुक्ति दिलाएगा यह योगासन

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की आधुनिक जीवनशैली में रीढ़ की हड्डी का लचीलापन और पाचन तंत्र का स्वस्थ होना एक बड़ी चुनौती बन गया है। 'मारीच्यासन' इन्हीं में से एक प्रभावशाली आसन है, जो न केवल रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है, बल्कि शरीर के आंतरिक अंगों की गहराई से डिटॉक्स करने में मदद करता है।

मारीच्यासन, ऋषि 'मारीचि' के नाम पर रखा गया है। 'मारीच्यासन' शब्द संस्कृत से बना है। इसमें 'मारीच' का अर्थ प्रकाश की किरण (सूर्य या चंद्रमा की किरण) होता है और 'आसन' का अर्थ बैठने की 'मुद्रा' या फिर योग की स्थिति होती है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने मारीच्यासन के महत्व पर जोर दिया है। उनके अनुसार, यह बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग (मेरुदंड को मोड़ने वाला) आसन है, जिसे ऋषि मारीचि के नाम पर रखा गया है।

इस आसान को करना बेहद आसान है। इसका अभ्यास करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब अपना दाहिना घुटना मोड़ें और बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें। सांस को छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें और पीछे की तरफ देखें। संभव हो, तो हाथों को पीठ के पीछे पकड़ें। 5-10 गहरी सांसें लेकर दूसरी तरफ दोहराएं। शुरुआत में आसन को धीरे-धीरे और योग शिक्षक की देखरेख में करें। सांस पर पूरा ध्यान दें, जल्दबाजी न करें।

इस आसन का अभ्यास करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर, तनाव कम और पेट के कई अंग सक्रिय होते हैं, जैसे लिवर, किडनी, प्लीहा, पेट, अग्न्याशय, छोटी आंत, पित्ताशय और प्रजनन तंत्र।

नियमित योग से न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। यह आसन शरीर को लचीला बनाता है और मन को शांत रखता है। वहीं, सही तरीके से सांस लेना और ध्यान केंद्रित करना इस आसन का सबसे बड़ा रहस्य है।

इसके अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं, लेकिन योग करने के साथ-साथ संतुलित आहार ग्रहण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सही खान-पान पाचन को दुरुस्त रखता है, मन को शांत करता है और शारीरिक-मानसिक शुद्धि में मदद करता है।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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