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आर्थिक अभाव में रहने वाले लोग जानते हैं, सफलता से बड़ा कोई त्योहार नहीं होता, Video

आर्थिक अभाव में रहने वाले लोग जानते हैं, सफलता से बड़ा कोई त्योहार नहीं होता, Video

समाज में त्योहारों को खुशी, उल्लास और उत्सव का प्रतीक माना जाता है, लेकिन जिन लोगों ने जीवन को आर्थिक अभावों में जिया है, वे अच्छी तरह जानते हैं कि असली त्योहार क्या होता है। उनके लिए रंग-बिरंगी लाइटें, नए कपड़े या भव्य आयोजन नहीं, बल्कि सफलता ही सबसे बड़ा उत्सव होती है। यह सफलता छोटी हो या बड़ी, उसका आनंद किसी त्योहार से कम नहीं होता।

आर्थिक तंगी में पलने वाला व्यक्ति बचपन से ही संघर्ष को अपना साथी बना लेता है। जहां कई लोगों के लिए शिक्षा, भोजन और सुविधाएं सामान्य बात होती हैं, वहीं अभाव में जीने वाले व्यक्ति के लिए ये सब लक्ष्य बन जाते हैं। जब कोई बच्चा फटे जूतों में स्कूल जाता है और पहली बार अच्छी नौकरी पाता है, तो वह दिन उसके लिए दीवाली से कम नहीं होता। जब किसी गरीब परिवार का बेटा या बेटी पहली बार घर में नियमित आमदनी लाता है, तो वह पल पूरे परिवार के लिए जश्न बन जाता है।

ऐसे लोगों के लिए सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार की जीत होती है। मां-बाप के चेहरे की मुस्कान, भाई-बहनों की आंखों में उम्मीद और घर में लौटती आत्मसम्मान की भावना—यही उनका उत्सव है। आर्थिक अभाव में पले लोग जानते हैं कि सफलता के पीछे कितनी रातों की भूख, कितने सपनों की कुर्बानी और कितने तानों का दर्द छिपा होता है। इसलिए जब मंज़िल मिलती है, तो उसका मूल्य कहीं अधिक होता है।

आज के समय में जब सोशल मीडिया पर त्योहार दिखावे और प्रतिस्पर्धा का रूप ले चुके हैं, तब सफलता की यह सादगी और गहराई और भी खास बन जाती है। जिन लोगों ने जीवन में सब कुछ आसानी से पाया है, वे शायद सफलता को सामान्य मान लें, लेकिन जिसने अभावों के बीच रास्ता बनाया हो, वह हर उपलब्धि को उत्सव की तरह मनाता है।

यह भी सच है कि आर्थिक संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है। वह सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, मेहनत और धैर्य से रास्ता निकाला जा सकता है। यही वजह है कि अभाव में रहने वाले लोग छोटी-छोटी सफलताओं को भी दिल से महसूस करते हैं। उनके लिए परीक्षा में पास होना, नौकरी मिलना, कर्ज चुकाना या बच्चों को अच्छी शिक्षा देना—सब किसी त्योहार से कम नहीं होता।

अंततः कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने गरीबी और संघर्ष को करीब से देखा है, वे जानते हैं कि असली खुशी भोग-विलास में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान से जीने में है। उनके लिए सफलता ही सबसे बड़ा त्योहार है, क्योंकि वही उन्हें अपने संघर्षों का जवाब और भविष्य की उम्मीद देती है।

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