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पहले जानकारी दुरुस्त करें केजरीवाल जी! जब इराक-अमेरिका लड़ ही नहीं रहे तो पीएम मोदी इससे उपजे हालात को लेकर देश को क्या बताएंगे?

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। इराक, इराक और सिर्फ इराक... दुनियाभर की मौजूदा स्थिति के लिए 'इराक-अमेरिका युद्ध' जिम्मेदार है। यह कहना है अरविंद केजरीवाल का। जब दुनियाभर में मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था गंभीर दौर से गुजर रही है। भारत जैसी दुनिया की चौथी आर्थिक महाशक्ति अपने नागरिकों को जरूरी सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उसी बीच, अरविंद केजरीवाल प्रकट हुए और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए 'इराक' का जिक्र करके अपनी फजीहत करवा बैठे।
पहले जानकारी दुरुस्त करें केजरीवाल जी! जब इराक-अमेरिका लड़ ही नहीं रहे तो पीएम मोदी इससे उपजे हालात को लेकर देश को क्या बताएंगे?

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। इराक, इराक और सिर्फ इराक... दुनियाभर की मौजूदा स्थिति के लिए 'इराक-अमेरिका युद्ध' जिम्मेदार है। यह कहना है अरविंद केजरीवाल का। जब दुनियाभर में मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था गंभीर दौर से गुजर रही है। भारत जैसी दुनिया की चौथी आर्थिक महाशक्ति अपने नागरिकों को जरूरी सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उसी बीच, अरविंद केजरीवाल प्रकट हुए और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए 'इराक' का जिक्र करके अपनी फजीहत करवा बैठे।

इराक-अमेरिका की लड़ाई से दुनिया में हालात खराब हैं, अर्थव्यवस्था पर दबाव है और कहीं न कहीं दुनियाभर के देशों की विकास दर पर भी प्रभाव पड़ रहा है। यह कहना है आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का। कहने का मतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दुनियाभर से जुड़े गंभीर मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उम्मीद थी कि वो कुछ कदम सुझाएंगे, सरकार की नीतियों की सराहना करेंगे और राजनीति को किनारे रखकर देश के नाम पर सरकार का साथ देने की घोषणा करेंगे, लेकिन अरविंद केजरीवाल की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस आरोपों पर ही टिकी रही। यहां तक कि उन्होंने सामान्य जानकारी भी नहीं होने का सबूत देकर अपनी फजीहत करवा ली।

उन्होंने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक-दो नहीं, कई बार इराक-अमेरिका युद्ध का जिक्र करके केंद्र सरकार से सवाल पूछे, लेकिन सोशल मीडिया की नजरों से नहीं बच सके और यूजर्स उनके सामान्य ज्ञान पर ही सवाल उठाने लगे। उनका कहना था कि मौजूदा युद्ध ईरान-अमेरिका के बीच जारी है, न कि इराक और अमेरिका के बीच।

मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर भारत सतर्कता से कदम उठा रहा है। केंद्र सरकार ने देश की जनता को भरोसा दिलाया है कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी। कई दौर की बैठकों के बाद सरकार ने भी सुनिश्चित किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की दिक्कत नहीं है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से सोना नहीं खरीदने, पेट्रोल-डीजल की बचत करने, कार पूलिंग, वर्क फ्रॉम होम और प्राकृतिक खेती जैसे उपाय अपनाने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि इससे भारत का आयात बिल कम होगा और 'मेड इन इंडिया' के साथ ही 'आत्मनिर्भर भारत' को भी बढ़ावा मिलेगा।

इसी बीच मोदी सरकार से देश की आर्थिक स्थिति की सच्चाई सामने रखने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने सरकार की सात अपील का जिक्र करते हुए तीन निवेदन भी किए, लेकिन अरविंद केजरीवाल बार-बार इराक-अमेरिका युद्ध का जिक्र करते चले गए। उनकी पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह सुनने को मिला। शुरुआत में लगा कि शायद अरविंद केजरीवाल 'जुबान फिसलने' के शिकार हैं, लेकिन बार-बार 'इराक' के जिक्र से सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके सामान्य ज्ञान पर ही सवाल उठा दिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 1950 से अब तक कई संकट आए, जिससे देश गुजरा, कई युद्ध झेले, आर्थिक संकट भी हुआ, लेकिन किसी प्रधानमंत्री ने इतने कठोर कदम उठाने की बात नहीं की। यहां तक कि लाल बहादुर शास्त्री ने भी ऐसा नहीं किया था। पूरा देश सदमे में है। आपने (पीएम मोदी ) इतने कठोर कदम उठाने को कहा है तो बताएं कि अर्थव्यवस्था का हाल बहुत बुरा है या आने वाले समय में और भी बहुत बुरा हो सकता है। हम सारे देशवासी देशभक्त हैं। कठोर से कठोर कदम उठाएंगे। कुर्बानियां भी देंगे, लेकिन पता तो चले कि अर्थव्यवस्था कहां पर खड़ी है।

उन्होंने आगे कहा कि इराक-अमेरिका युद्ध की वजह से ऐसा हो रहा है। इराक-अमेरिका युद्ध की वजह से सारी दुनिया प्रभावित है, लेकिन किसी भी देश की सरकार ने ऐसे कठोर कदम नहीं उठाने की बात नहीं कही, लेकिन अरविंद केजरीवाल भूल गए कि इतने गंभीर मुद्दे पर बयान देने से पहले थोड़ा 'फैक्ट चेक' कर लें। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने तीन निवेदन भी किए। पहला, आज हमारी क्या स्थिति है और अर्थव्यवस्था की आने वाले एक साल में क्या स्थिति होगी, इस पर सच्चाई बताई जाए। दूसरा, जो कदम किसी भी देश ने नहीं उठाए। ऐसे कदम भारत को उठाने की क्या वजह है और तीसरा, इसका सारा बोझ मध्यम वर्गीय परिवार पर क्यों डाला जा रहा है? आखिर मध्यम वर्ग से ही क्यों कुर्बानी मांगी जा रही है?

--आईएएनएस

एबीएम/वीसी

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