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शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, वीडियो में जाने लेकिन जनता की परेशानी और प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि भी जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट

शांतिपूर्ण प्रदर्शन मौलिक अधिकार, वीडियो में जाने लेकिन जनता की परेशानी और प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि भी जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने से पहले प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और आम जनता को होने वाली असुविधा जैसे पहलुओं पर विचार करना भी जरूरी है। अदालत ने यह टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुंबई में हुए ‘जेल भरो’ आंदोलन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। इस मामले में एडवोकेट सावर देवरे ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ हाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित अवैध हिरासत से जुड़ी याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ था प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो’ आंदोलन किया था। प्रदर्शन के बाद मुंबई पुलिस ने आयोजकों और 400 से 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ एडवोकेट सावर देवरे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े कानूनी पहलुओं पर टिप्पणी की।

प्रदर्शन के अधिकार के साथ जनता की परेशानी पर भी विचार जरूरी

चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने से पहले सभी संबंधित पहलुओं को देखना आवश्यक है। इनमें प्रदर्शनकारियों की पृष्ठभूमि और प्रदर्शन के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानी भी शामिल है।अदालत की टिप्पणी ऐसे मामलों में प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करती है। हालांकि, इस टिप्पणी को किसी विशेष प्रदर्शन या पुलिस कार्रवाई को अंतिम रूप से सही या गलत ठहराने वाला फैसला नहीं माना जाना चाहिए। मामले में याचिकाकर्ता की दलीलों और सरकार के जवाब पर आगे विचार किया जाना है।

कथित अवैध हिरासत के आरोपों पर सरकार से जवाब तलब

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को उन याचिकाओं पर जवाब देने का निर्देश दिया, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ मुंबई में हाल में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लेने के आरोप लगाए गए हैं।इन याचिकाओं में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने सरकार से इस संबंध में अपना पक्ष रखने को कहा है। आरोपों की सत्यता और पुलिस की कार्रवाई की वैधता पर अंतिम निष्कर्ष आगे की सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निकाला जाएगा।

19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित की गई है। इस दौरान महाराष्ट्र सरकार का जवाब और याचिका में उठाए गए मुद्दे आगे की कार्यवाही के लिए अहम हो सकते हैं।फिलहाल अदालत की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार पर विचार करते समय सार्वजनिक व्यवस्था और आम लोगों की सुविधा जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। मामले में अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।

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