पासपोर्ट-नागरिकता विवाद पर सलमान खुर्शीद ने उठाए सवाल, कहा-पासपोर्ट पर स्पष्टीकरण की जरूरत क्यों पड़ी
नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने पासपोर्ट और नागरिकता के मुद्दे से लेकर एनसीईआरटी की किताबों में आपातकाल को शामिल करने समेत अन्य मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछते हुए कहा कि जनता को स्पष्ट और पूरी जानकारी देना सरकार का दायित्व है।
विदेश मंत्रालय द्वारा यह स्पष्ट किए जाने पर कि पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं, सलमान खुर्शीद ने आईएएनएस से कहा कि यह स्पष्टीकरण कई लोगों को चौंका सकता है। पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को कई शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं और विभिन्न दस्तावेज जमा करने होते हैं।
सलमान खुर्शीद ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम में साफ लिखा है कि यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है तो उसे पासपोर्ट देने से इनकार किया जा सकता है। ऐसे में यह कहना उचित होगा कि पासपोर्ट और नागरिकता के बीच कुछ न कुछ संबंध अवश्य है।
उन्होंने माना कि नागरिकता का अंतिम निर्धारण नागरिकता अधिनियम के तहत होता है लेकिन दोनों कानूनों को साथ पढ़ने पर पासपोर्ट का नागरिकता से महत्व जुड़ा दिखाई देता है। आम व्यक्ति के लिए इस अंतर को समझना आसान नहीं है और सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इतने वर्षों बाद यह स्पष्टीकरण देने की जरूरत क्यों पड़ी।
2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर, जिसमें कहा गया था कि केवल पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता साबित नहीं की जा सकती, सलमान खुर्शीद ने कहा कि अदालतों के कई फैसले होते हैं और उन पर अपील भी की जा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार उस फैसले को आधार मानती है तो उसे उस समय ही स्पष्ट करना चाहिए था। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं, खासकर तब जब कई जगहों पर लोगों की नागरिकता और मतदान के अधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में आपातकाल पर अध्याय शामिल किए जाने को लेकर सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार के पास पाठ्यपुस्तकों में अध्याय जोड़ने का अधिकार है। लेकिन असली सवाल यह है कि किसी घटना को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी यह नहीं नकार सकता कि आपातकाल लगा था, लेकिन क्या उसके पीछे की परिस्थितियों और उसके परिणामों को भी समान रूप से बताया जा रहा है?
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भी जिक्र होना चाहिए कि आपातकाल के बाद चुनाव हुए थे, कांग्रेस चुनाव हारी थी और बाद में दो-तिहाई बहुमत के साथ फिर सत्ता में लौटी थी। इतिहास को चुनिंदा तथ्यों के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी सच्चाई के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
भाजपा द्वारा आपातकाल के 51 साल पर 'संविधान हत्या दिवस' मनाए जाने पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि संविधान सभी को अपनी बात रखने का अधिकार देता है, इसलिए कोई भी ऐसा कार्यक्रम मना सकता है। लेकिन उन्होंने कहा कि यह भी स्वीकार करना चाहिए कि संविधान आज भी जीवित है और विभिन्न सरकारों के आने-जाने के बावजूद उसकी ताकत बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज संविधान को कमजोर करने के सवाल उठ रहे हैं और पहले उन सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। सलमान खुर्शीद ने कहा कि दुनिया के कई लोग आज "अघोषित आपातकाल" जैसी बातों की चर्चा कर रहे हैं। आपातकाल संविधान के तहत लागू किया गया था और यदि उसका दुरुपयोग हुआ था तो उसका फैसला अदालतों और जनता दोनों ने किया था।
राम मंदिर दान विवाद पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है तो सामान्य प्रक्रिया के तहत सबसे पहले एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर दर्ज किए बिना सीधे एसआईटी गठित करने का फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के करीब माने जाने वाले कई लोग भी अब सवाल उठा रहे हैं कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण से बने राम मंदिर में यदि दान की राशि को लेकर विवाद पैदा हो रहा है तो यह बेहद गंभीर विषय है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन ही सबसे व्यावहारिक रास्ता नजर आता है। विपक्षी दल भाजपा की उन नीतियों का विरोध करना चाहते हैं जिन्हें वे सामाजिक सौहार्द और समाज के लिए नुकसानदायक मानते हैं।
उन्होंने कहा कि देशभर में जहां-जहां विपक्षी गठबंधन बने, वहां बेहतर परिणाम देखने को मिले, जबकि जहां गठबंधन नहीं हो सका, वहां नुकसान उठाना पड़ा। सलमान खुर्शीद ने कहा कि इंडिया ब्लॉक पहले से मौजूद एक व्यापक मंच है और अब उसे जमीनी स्तर तक मजबूत करना विपक्ष की जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
--आईएएनएस
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