पश्चिम बंगाल में गुंडा विधेयक और ओबीसी आरक्षण पर सियासत, रिजु दत्ता ने किया समर्थन
कोलकाता, 29 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तावित गुंडा विधेयक और ओबीसी आरक्षण से जुड़े संशोधन को लेकर सियासत गरम है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित नेता रिजु दत्ता ने दोनों विधेयकों पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने टीएमसी पार्षदों और नेताओं की संपत्तियों की ऑडिट कराने और बड़े नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।
रिजु दत्ता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि विधानसभा में लाया जा रहा गुंडा विधेयक समय की जरूरत है। यह कानून काफी पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। पिछले कई वर्षों में पश्चिम बंगाल में गुंडागर्दी और बाहुबलियों की संस्कृति बढ़ी है, जिस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी हो गया है। राज्य में ऐसे कई लोग राजनीतिक दलों के बैनर तले रहकर बाहुबली की तरह काम करते हैं, गरीबों और महिलाओं पर अत्याचार करते हैं और कानून व्यवस्था को चुनौती देते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए।
इस दौरान रिजु दत्ता ने विधायक हुमायूं कबीर का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनकी भाषा और सार्वजनिक व्यवहार पर सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भी विधानसभा में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। राजनीतिक संरक्षण में रहने वाले ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए नहीं होना चाहिए। यदि विपक्ष का कोई नेता सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहा हो तो उसके खिलाफ इस कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। इस एक आशंका को छोड़कर वह इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि वर्षों से गरीबों और महिलाओं पर अत्याचार करने वाले बाहुबलियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।
ओबीसी आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित संशोधन पर रिजु दत्ता ने कहा कि यह व्यवस्था मूल रूप से वामपंथी सरकार के समय लागू की गई थी। उस समय 42 ओबीसी श्रेणियों में से 41 श्रेणियां एक विशेष समुदाय को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। वर्तमान सरकार यदि उसमें सुधार कर रही है तो यह सकारात्मक कदम है। ओबीसी का लाभ उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जो वास्तव में इसके पात्र हैं। यदि केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए बड़ी संख्या में लोगों को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया जाएगा तो सामान्य वर्ग के युवाओं के भविष्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? प्रस्तावित बदलाव सकारात्मक हैं और वह इनका समर्थन करते हैं।
बातचीत के दौरान रिजु दत्ता ने टीएमसी के पार्षदों और नेताओं की संपत्ति की जांच की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सीएम सुवेंदु अधिकारी को भी इस मुद्दे को उठाना चाहिए और तृणमूल कांग्रेस के सभी पार्षदों की संपत्तियों का ऑडिट कराया जाना चाहिए। यह जांच होनी चाहिए कि पार्षद बनने से पहले उनकी संपत्ति कितनी थी और पद संभालने के बाद उसमें कितना इजाफा हुआ। उनका तर्क है कि पार्षद का वेतन सीमित होता है, फिर भी कई लोगों के पास आलीशान इमारतें और महंगी गाड़ियां कैसे आ गईं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले छोटे-मोटे कारोबार करते थे, लेकिन आज कई लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे हैं। यदि उनकी आय का कोई वैध स्रोत है तो वह ऑडिट में सामने आ जाएगा, लेकिन जनता को पूरी पारदर्शिता मिलनी चाहिए। दत्ता ने आगे कहा कि हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल मुख्यमंत्री से मिल लेने या उनके पैर छू लेने से किसी को छूट नहीं मिलती। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पिछली सरकारों की तरह इस बार भी केवल छोटे स्तर के लोगों पर ही कार्रवाई होगी। बंगाल की जनता यह देखना चाहती है कि जिन बड़े नेताओं के संरक्षण में कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियां चलती रहीं, उनके खिलाफ कब कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि केवल छोटी मछलियों को पकड़ने से काम नहीं चलेगा। जनता यह देखना चाहती है कि बड़ी मछलियों और प्रभावशाली नेताओं पर भी समान रूप से कानून का शिकंजा कसा जाए।
--आईएएनएस
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