Samachar Nama
×

पश्चिम बंगाल चुनाव : सिलीगुड़ी सीट पर 'संग्राम', इतिहास से लेकर रणनीति तक

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दार्जिलिंग जिले की सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल की एक अहम हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जा रही है। राज्य का प्रमुख व्यापारिक केंद्र, सीमावर्ती रणनीतिक स्थिति, बदलते राजनीतिक समीकरण और हाल के चुनावी रुझान इस सीट को खास बनाते हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव : सिलीगुड़ी सीट पर 'संग्राम', इतिहास से लेकर रणनीति तक

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दार्जिलिंग जिले की सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल की एक अहम हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जा रही है। राज्य का प्रमुख व्यापारिक केंद्र, सीमावर्ती रणनीतिक स्थिति, बदलते राजनीतिक समीकरण और हाल के चुनावी रुझान इस सीट को खास बनाते हैं।

कोलकाता और आसनसोल के बाद सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल का तीसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र है। पास के जलपाईगुड़ी के साथ यह ट्विन सिटी का रूप ले चुका है। पूर्वी हिमालय की तलहटी और महानंदा नदी के किनारे बसा यह शहर उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब होने के कारण सिलीगुड़ी को विशेष आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक पहचान मिली है।

ब्रिटिश काल में इसे एक बड़े ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया गया। 1881 में शुरू हुई दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और प्रमुख रेलवे जंक्शन बनने से इस शहर की कनेक्टिविटी और महत्व तेजी से बढ़ा।

साल 1951 में अस्तित्व में आई सिलीगुड़ी विधानसभा सीट दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसमें सिलीगुड़ी नगर निगम के 33 वार्ड शामिल हैं। शुरुआती चुनावों में यह दो सदस्यीय सीट थी, लेकिन 1962 से यह एक सदस्यीय क्षेत्र बन गया।

सिलीगुड़ी का राजनीतिक इतिहास बहुदलीय प्रतिस्पर्धा का रहा है। यहां हर दौर में जनादेश बदला है। 1977 से 2006 तक सीपीआई (एम) ने 8 बार जीत दर्ज की है। इसके अलावा, कांग्रेस ने इस सीट से 4 बार जीत दर्ज की है। वहीं, अखिल भारतीय गोरखा लीग, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने एक-एक बार जीत दर्ज की है।

लेफ्ट के वरिष्ठ नेता अशोक भट्टाचार्य ने 1991 से 2006 तक लगातार चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। पिछले कुछ चुनाव पर अगर हम नजर डालें तो 2011 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने सीपीआई (एम) को हराया। 2016 के चुनाव में सीपीआई (एम) ने तृणमूल कांगेस को हराया और 2021 के चुनाव में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को हराया। इस सीट से जुड़ी एक खास बात यह है कि सिलीगुड़ी में मतदान प्रतिशत हमेशा ऊंचा रहा है।

सिलीगुड़ी की अर्थव्यवस्था प्रमुख रूप से चाय उद्योग, लकड़ी-वन उत्पाद, पर्यटन के साथ-साथ परिवहन और व्यापार पर आधारित है। यह उत्तर बंगाल और उत्तर-पूर्व के लिए बड़ा ट्रेड और डिस्ट्रीब्यूशन हब है। छोटे उद्योग, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बड़ी संख्या में रोजगार देते हैं। दार्जिलिंग, दुआर, सिक्किम और भूटान जाने वाले पर्यटकों के लिए यह मुख्य केंद्र है।

सिलीगुड़ी सिस्मिक जोन-4 में आता है और भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है। 2011 के 6.8 तीव्रता के भूकंप सहित कई झटके यहां महसूस किए जा चुके हैं। महानंदा और तीस्ता नदियों के कारण मानसून में बाढ़ का खतरा भी बना रहता है। आसपास के चाय बागान, साल के जंगल और महानंदा वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी इस क्षेत्र की पर्यावरणीय पहचान हैं।

हाल के चुनावों में भाजपा के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए कहा जा सकता है कि भाजपा फिलहाल सिलीगुड़ी में मजबूत है। वहीं, शहरी वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना और उत्तर बंगाल में संगठन को और सक्रिय करना तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा शहरी राजनीतिक केंद्र है। इसके अलावा, यह व्यापार, पर्यटन और ट्रांजिट हब के साथ-साथ उत्तर बंगाल की राजनीति का मूड तय करने वाली सीट है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

Share this story

Tags