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पश्चिम बंगाल: भाटपाड़ा विधानसभा में भाजपा की मजबूत बढ़त, हिंदी भाषी वोटर बने पार्टी की रीढ़

भाटपाड़ा, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में स्थित भाटपाड़ा विधानसभा सीट 1951 से राज्य की चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। यह बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और पूरी तरह शहरी है, जिसमें भाटपाड़ा म्युनिसिपैलिटी के वार्ड 1 से 17 शामिल हैं। हुगली नदी के पूर्वी तट पर बसा यह इलाका कोलकाता का सैटेलाइट शहर है और कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के दायरे में आता है।
पश्चिम बंगाल: भाटपाड़ा विधानसभा में भाजपा की मजबूत बढ़त, हिंदी भाषी वोटर बने पार्टी की रीढ़

भाटपाड़ा, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में स्थित भाटपाड़ा विधानसभा सीट 1951 से राज्य की चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। यह बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और पूरी तरह शहरी है, जिसमें भाटपाड़ा म्युनिसिपैलिटी के वार्ड 1 से 17 शामिल हैं। हुगली नदी के पूर्वी तट पर बसा यह इलाका कोलकाता का सैटेलाइट शहर है और कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के दायरे में आता है।

भाटपाड़ा में अब तक 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। पहले पांच दशकों तक कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां (सीपीआई (एम)) ने बारी-बारी से सीट पर कब्जा किया। दोनों ने छह-छह बार जीत हासिल की। 21वीं सदी में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की लहर आई, जहां अर्जुन सिंह ने 2001 से 2016 तक लगातार चार बार जीत दर्ज की।

2019 में अर्जुन सिंह के इस्तीफे (भाजपा में शामिल होने) के कारण उपचुनाव हुआ, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। भाजपा के पवन कुमार सिंह (अर्जुन सिंह के बेटे) ने टीएमसी के मदन मित्रा को 23,104 वोटों से हराया। 2021 में पवन सिंह ने टीएमसी के जितेंद्र शॉ को 13,687 वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी। 2021 में भाजपा को 57,244 वोट (53.4 प्रतिशत) मिले, जबकि टीएमसी को 43,557 वोट (40.63 प्रतिशत) प्राप्त हुए थे।

भाटपाड़ा में भाजपा की बढ़ती पकड़ लोकसभा चुनावों में भी दिखी। 2014 में यह सीट भाजपा से 2,515 वोट आगे थी, 2019 में बढ़त 29,707 वोटों तक पहुंची और 2024 में 17,463 वोटों की कम बढ़त बनी रही। दिलचस्प है कि भाजपा ने 2014 और 2024 में बैरकपुर लोकसभा सीट नहीं जीती, फिर भी विधानसभा स्तर पर मजबूत स्थिति बनी रही।

भाटपाड़ा का नाम 'भट्टा-पल्ली' से जुड़ा है, जो ब्राह्मण संस्कृत विद्वानों की बस्ती थी। यहां पारंपरिक 'टोल' स्कूल संस्कृत शिक्षा के लिए प्रसिद्ध थे। 1899 में नैहाटी से अलग होकर नगर पालिका बनी। ब्रिटिश काल और आजादी के बाद जूट मिलों के कारण यह इंडस्ट्रियल हब बना। जूट प्रोसेसिंग ने बाहर से बड़ी संख्या में मजदूरों को आकर्षित किया, जिनमें हिंदी भाषी समुदाय प्रमुख है। जूट मिलें बंद हो गईं, लेकिन छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, ट्रेडिंग और इनफॉर्मल सेक्टर अर्थव्यवस्था का आधार हैं।

भौगोलिक रूप की बात करें तो इस क्षेत्र का इलाका हुगली नदी (पश्चिम) और सियालदह-कृष्णानगर रेल लाइन (पूर्व) से घिरा है। भाटपाड़ा रेलवे स्टेशन सियालदह-राणाघाट लाइन पर है और बैरकपुर ट्रंक रोड सड़क कनेक्टिविटी देता है। नैहाटी (5 किमी), कांचरापाड़ा (8 किमी), हालिसहर (6 किमी) और हुगली जिले में चंदननगर (10 किमी) पास हैं। कोलकाता सिर्फ 25 किमी दूर है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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