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पश्चिम बंगाल चुनाव : मोयना में फिर चला अशोक डिंडा का 'स्विंग', भाजपा का दबदबा कायम

कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले की अहम मोयना विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर जीत दर्ज करते हुए अपना कब्जा बरकरार रखा है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा ने 2026 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार इस सीट से जीत हासिल की है।
पश्चिम बंगाल चुनाव : मोयना में फिर चला अशोक डिंडा का 'स्विंग', भाजपा का दबदबा कायम

कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले की अहम मोयना विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर जीत दर्ज करते हुए अपना कब्जा बरकरार रखा है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा ने 2026 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार इस सीट से जीत हासिल की है।

चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, अशोक डिंडा को 1,27,166 वोट मिले और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार चंदन मंडल को 16,241 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, सीपीआई के उम्मीदवार स्वपन कुमार बर्मन महज 4,499 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

मोयना सीट पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय जरूर था, लेकिन मुख्य टक्कर भाजपा और टीएमसी के बीच ही देखने को मिली। नतीजों ने साफ कर दिया कि इस क्षेत्र में अशोक डिंडा की व्यक्तिगत साख और भाजपा का संगठनात्मक आधार दोनों ही मजबूत बने हुए हैं।

गौरतलब है कि अशोक डिंडा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में पहली बार इस सीट से जीत दर्ज की थी। तब उन्होंने बेहद कड़े मुकाबले में टीएमसी के संग्राम कुमार दोलाई को मात्र 1,260 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। 2026 में उन्होंने अपनी बढ़त को काफी बढ़ाते हुए निर्णायक जीत हासिल की, जो उनके बढ़ते जनाधार का संकेत है।

मोयना विधानसभा सीट का गठन 1951 में हुआ था और यह क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय रहा है। 2026 के चुनाव में इस सीट पर दूसरे चरण के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसमें मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस क्षेत्र का सामाजिक समीकरण भी चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभाता है। मोयना और आसपास के इलाकों में 'महिष्य' समुदाय का दबदबा है, जो पारंपरिक रूप से कृषक वर्ग से जुड़ा है और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मतदाताओं की भी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, लेकिन जीत की चाबी अक्सर महिष्य वोट बैंक के पास ही मानी जाती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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