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परिसीमन बिल दक्षिण भारत की आवाज दबाने की साजिश, इतिहास माफ नहीं करेगा: नसीम सिद्दीकी

परिसीमन बिल दक्षिण भारत की आवाज दबाने की साजिश, इतिहास माफ नहीं करेगा: नसीम सिद्दीकी
परिसीमन बिल दक्षिण भारत की आवाज दबाने की साजिश, इतिहास माफ नहीं करेगा: नसीम सिद्दीकी

मुंबई, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था, मुंबई में गैंगवार और देश के राजनीतिक हालात को लेकर कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने मुंबई में अपराध बढ़ने का आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। वहीं, परिसीमन विधेयक को दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीतिक आवाज कमजोर करने वाला बताया। सिद्दीकी ने असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना की और अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात का समर्थन करते हुए इसे पुराने राजनीतिक संबंधों से जोड़ा।

मुंबई की कानून-व्यवस्था पर नसीम सिद्दीकी ने कहा कि राज्य में गुंडों का राज चल रहा है। अपराध के मामले में महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश और बिहार से भी आगे निकल गया है। आम धारणा है कि सरकार के संरक्षण के बिना कोई अपराधी फल-फूल नहीं सकता। मुंबई में पहले के गैंगवार भले ही खत्म हो गए हों, लेकिन अब एक नया गिरोह सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्थिति के पीछे केंद्र सरकार का किसी न किसी रूप में समर्थन होने की बातें भी कही जा रही हैं।

परिसीमन विधेयक पर सिद्दीकी ने कहा कि इसे लागू करना दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीतिक प्रासंगिकता खत्म करने जैसा होगा। इससे दिल्ली में इन क्षेत्रों की आवाज कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि परिसीमन के बहाने उत्तर भारत में संसदीय सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, जबकि दक्षिण भारत की सीटें आधी हो सकती हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से भी इस विषय पर विचार करने की अपील की। सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें इस तरह की प्रक्रिया में कथित साजिशकर्ताओं का साथ नहीं देना चाहिए, अन्यथा इतिहास उन्हें माफ नहीं करेगा।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की आजम खान से मुलाकात पर सिद्दीकी ने हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बनाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता भी जेल में बंद लोगों से मिलने जाते हैं, लेकिन उस समय मुलाकात को धर्म के नजरिये से नहीं देखा जाता। अखिलेश यादव और आजम खान पुराने राजनीतिक सहयोगी रहे हैं। आजम खान ने लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के साथ काम किया और समाजवादी पार्टी को स्थापित करने में योगदान दिया। इसलिए अखिलेश यादव का उनसे मिलना पुराने संबंधों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

असदुद्दीन ओवैसी की आलोचना करते हुए सिद्दीकी ने उन्हें राजनीति का 'जहर' बताया। उन्होंने कहा कि ओवैसी मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का इस्तेमाल कर भाजपा को राजनीतिक फायदा पहुंचाते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से ओवैसी की राजनीति को समझने और सोच-समझकर निर्णय लेने की अपील की। सिद्दीकी ने तेलंगाना में ओवैसी की राजनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका प्रभाव मुख्य रूप से हैदराबाद तक सीमित है। उन्होंने कहा कि लोगों को धार्मिक प्रतीकों और भावनात्मक मुद्दों के आधार पर प्रभावित होने के बजाय अपने विवेक से फैसला करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर सिद्दीकी ने कहा कि देश में अब किसी एक पार्टी का एकाधिकार नहीं है और क्षेत्रीय दल मजबूत हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की राजनीतिक ताकत अधिक है, जबकि कांग्रेस का जनाधार सीमित है। सिद्दीकी ने कांग्रेस को आगामी चुनावों में सीटों के बंटवारे पर व्यावहारिक रुख अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस जरूरत से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, तो इससे भाजपा को फायदा हो सकता है। उन्होंने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में समझदारी से रणनीति बनानी होगी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर सिद्दीकी ने नाराजगी जताई और उसे निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए आंदोलनों में विदेशी हाथ होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के आंदोलन को आतंकवाद और सिखों के आंदोलन को विदेशी प्रभाव से जोड़ना उचित नहीं है। भारत गांधीवादी परंपरा का देश है और विरोध प्रदर्शनों में अहिंसा का महत्व रहा है। उन्होंने सरकार से युवाओं के साथ बातचीत करने और उनकी चिंताओं को समझने की अपील की। साथ ही आशंका जताई कि यदि समय रहते संवाद नहीं हुआ, तो आंदोलन की स्थिति बिगड़ सकती है।

देश में 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन की चर्चा पर सिद्दीकी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार बदलने की मांग करना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता अपने वोट के जरिए सरकार बदल सकती है। सिद्दीकी ने आगे कहा कि यदि कोई सरकार भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण नहीं कर पाती, तो उसे बदलने की मांग स्वाभाविक है। सिद्दीकी ने वर्ष 2029 में सत्ता परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता का होता है।

--आईएएनएस

पीएसके

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