परिसीमन पर कर्नाटक सरकार ने उठाए सवाल, आबादी को ही आधार बनाने पर आपत्ति
बेंगलुरु, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। बेंगलुरु में 6 अप्रैल को कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने विधानसभा और लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में केवल आबादी को ही आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि अगर केवल जनसंख्या को ही आधार बनाया गया, तो कर्नाटक को लोकसभा में अपेक्षाकृत कम सीटें मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत की आबादी अधिक होने के कारण वहां सीटों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि दक्षिणी राज्यों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनके अनुसार, यह स्थिति उचित नहीं है और इस पर दोबारा विचार होना चाहिए।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बयान का समर्थन करते हुए कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने परिवार नियोजन को प्रभावी तरीके से लागू किया है, जिससे यहां की आबादी नियंत्रित रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी भी राज्य के लिए नुकसान का कारण नहीं बननी चाहिए।
हिंदी को कक्षा 10 की परीक्षा में अनिवार्य न बनाने के राज्य सरकार के फैसले और इस पर चल रहे विवाद के बारे में उन्होंने कहा कि हिंदी विरोध का मुद्दा नया नहीं है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी इस तरह के विरोध देखने को मिलते थे। क्षेत्रीय भाषाओं को उचित महत्व देने की मांग लंबे समय से उठती रही है और इसका समाधान निकालना जरूरी है।
कर्नाटक के गृहमंत्री ने यह भी कहा कि अलग-अलग राज्य अपनी-अपनी भाषाओं के संरक्षण की मांग करते हैं, जैसे कर्नाटक में कन्नड़ और अन्य दक्षिणी राज्यों में अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है। यह मुद्दा खासकर हिंदी न बोलने वाले राज्यों में लंबे समय से बना हुआ है।
रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि राज्य को जरूरी संसाधनों की पर्याप्त आपूर्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और केंद्र से बराबर आपूर्ति की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर जरूर पड़ रहा है, लेकिन राज्यों को न्यूनतम आवश्यक आपूर्ति मिलनी ही चाहिए।
आगामी उपचुनावों को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी को अच्छा समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में किए गए कामों का लाभ चुनाव में जरूर दिखाई देगा और उनकी पार्टी इन सीटों पर जीत दर्ज करेगी।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को लेकर जो भ्रम फैलाया गया है, उसके लिए भारतीय जनता पार्टी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया, जबकि उन्होंने यह बात केवल उसी संदर्भ में कही थी।
परमेश्वर ने कहा कि आंतरिक आरक्षण को लेकर सबसे पहले भ्रम किसने पैदा किया, यह देखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सदाशिव आयोग की रिपोर्ट को पहले खारिज कर दिया गया था और बाद में जब इसे दिल्ली भेजा गया, तो उसमें कुछ प्रतिशत जोड़ दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि ये प्रतिशत किस आधार पर तय किए गए थे। उनके अनुसार, उनका बयान इसी मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाए गए भ्रम का जवाब था।
जब उनसे पूछा गया कि क्या आंतरिक आरक्षण के मुद्दे का असर कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं पर पड़ेगा, तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से आंतरिक आरक्षण लागू करने के पक्ष में रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी यह नहीं कहा कि वह इसे वापस लेगी या लागू नहीं करेगी, बल्कि पार्टी इसको लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने आगे बताया कि आंतरिक आरक्षण को लेकर प्रक्रिया अभी जारी है। इसी वजह से 22 अप्रैल को प्रस्तावित विशेष मंत्रिमंडल बैठक को टाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि उपचुनाव खत्म होने के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विशेष मंत्रिमंडल बैठक बुलाने का अधिकार मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के पास होता है।
आईपीएल टिकट वितरण से जुड़े विवाद पर भी परमेश्वर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आजकल ज्यादातर टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं और इस पर पूरी तरह नियंत्रण रखना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि टिकट किस आधार पर बांटे जाते हैं और हर बात में कमी निकालना ठीक नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार टिकट पर लिखा होता है कि वह किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता, लेकिन अगर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है, तो कोई भी व्यक्ति उस टिकट का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर विधायकों को दो टिकट मिलते हैं और उनका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है।
--आईएएनएस
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