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परमिंदर झोटा डेथ केस: अकाली दल ने सीएम मान से मांगा इस्तीफा, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

परमिंदर झोटा डेथ केस: अकाली दल ने सीएम मान से मांगा इस्तीफा, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
परमिंदर झोटा डेथ केस: अकाली दल ने सीएम मान से मांगा इस्तीफा, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

चंडीगढ़, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल ने अपना चुनावी घोषणापत्र तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने आईएएनएस को बताया कि घोषणापत्र समिति विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात कर उनके सुझाव ले रही है। इसी क्रम में वकीलों और सरकारी कर्मचारियों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

कलेर ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परमिंदर झोटा की मौत और उनके परिवार पर कथित दबाव को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर आम आदमी पार्टी के रुख की आलोचना की और 2027 के चुनाव में गठबंधन को लेकर कहा कि अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और पार्टी की कोर कमेटी करेगी।

अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंजाब के मुद्दों पर आधारित राजनीति करता है और पार्टी का घोषणापत्र पंजाबियों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदड़ के नेतृत्व में अलग-अलग वर्गों के लोगों से लगातार बातचीत की जा रही है। पंजाब इस समय आर्थिक चुनौतियों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है। उद्योग राज्य से बाहर जा रहे हैं, इसलिए घोषणापत्र तैयार करते समय लोगों की वास्तविक समस्याओं और अपेक्षाओं को समझना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि वकीलों के साथ बैठक में उनकी समस्याओं और भविष्य में अकाली दल की सरकार बनने पर उनके लिए किए जाने वाले कामों पर सुझाव लिए जाएंगे। सरकारी कर्मचारियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान एक बड़ा सवाल है और कर्मचारियों को अपनी मांगों के लिए धरने देने पड़ रहे हैं।

नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर झोटा के मामले में कलेर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि परमिंदर के पिता ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर परिवार पर कथित दबाव की बात कही है। कलेर ने सवाल किया कि जब नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा किया जा रहा है, तब नशे के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो रही।

उन्होंने कहा कि परमिंदर झोटा ने 2023 में अश्विनी के खिलाफ आवाज उठाई थी और इसके बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। कलेर ने अन्य मामलों का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि नशे की समस्या उठाने वाले लोगों के साथ पुलिस कार्रवाई और कथित दुर्व्यवहार हुआ है। उन्होंने एक ऐसे पिता का जिक्र किया, जिसने अपने बेटे की नशे की लत और परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई थी।

अकाली दल के प्रवक्ता ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को लेकर सरकार के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर दिखाई देता है। इस मुद्दे पर अदालत की टिप्पणियां भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि, ये सभी आरोप कलेर ने लगाए हैं।

एसआईआर को लेकर कलेर ने आम आदमी पार्टी पर दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर से संबंधित बैठकों में आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल होते रहे, लेकिन उस समय किसी तरह का विरोध या आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। कलेर ने पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका की तारीफ करते हुए दावा किया कि राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि बैठकों में विरोध नहीं करने के बाद अब विधानसभा में प्रस्ताव लाकर राजनीति क्यों की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि परमिंदर झोटा की मौत से जुड़े सवालों और लोगों की भावनाओं से ध्यान हटाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उठाया जा रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल के गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर कलेर ने कहा कि पार्टी अभी अपनी चुनावी रणनीति पर विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन करना है या अकेले चुनाव लड़ना है, इसका फैसला पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को दिए गए अधिकारों और कोर कमेटी की चर्चा के आधार पर होगा। पार्टी किसी क्षेत्रीय दल या राष्ट्रीय पार्टी के साथ चुनाव लड़ने अथवा अकेले मैदान में उतरने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है। सीटों के बंटवारे पर अभी चर्चा करना जल्दबाजी होगी।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी

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