पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण वाहनों और पटाखों से 100 गुना ज्यादा: बृजभूषण शरण सिंह
गोंडा, 7 नवंबर (आईएएनएस)। वायु प्रदूषण को लेकर पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने चिंता जताई है। उन्होंने पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार लोगों और गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उनका आरोप है कि पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए नियम और कानून तो हैं लेकिन उनका प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है।
पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि राज्य और देश में प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों ने मानो सब कुछ अपने हाल पर छोड़ दिया है। फैक्ट्रियों, वाहनों से निकलने वाले धुएं और ईंट-भट्ठों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की ओर किसी भी सरकार का पर्याप्त ध्यान नहीं है। पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण दिवाली के पटाखों, ईंट-भट्ठों और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले कुल प्रदूषण से 100 गुना अधिक है।
उन्होंने कहा कि एक बीघे खेत में पराली जलाने से जितना धुआं निकलता है, उतना धुआं एक वाहन पूरे साल में भी नहीं छोड़ता होगा। गांवों में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है। शाम के समय ग्रामीण इलाकों से गुजरने पर ऐसा लगता है, जैसे चारों तरफ आग लगी हो। प्रशासन चाहे तो पराली जलने के 15 से 20 दिन बाद भी पता लगा सकता है कि किस खेत में पराली जलाई गई थी।
पूर्व सांसद ने पराली जलाने से मिट्टी को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पराली की आग से खेत की उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत प्रभावित होती है। इससे जमीन की उर्वरता को नुकसान पहुंचता है। इस समस्या से निपटने के लिए किसानों के बीच जागरूकता फैलाने के साथ-साथ उन्हें ऐसे कृषि यंत्र उपलब्ध कराने चाहिए, जिनकी मदद से पराली को खेत में ही मिलाया जा सके।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ड्रोन के माध्यम से भी खेतों की निगरानी की जा सकती है लेकिन सवाल यह है कि इन नियमों को लागू कौन कर रहा है? प्रशासन चाहे तो आज भी पराली जलाने वाले खेतों की पहचान कर सकता है लेकिन इस गंभीर समस्या को लेकर छोटे से बड़े स्तर तक के अधिकारियों में चिंता दिखाई नहीं देती।
वाहनों पर कार्रवाई को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि जिस तरह पुरानी गाड़ियों को हटाने के लिए कार्रवाई की जा रही है, उससे उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने और नई गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने की कोशिश होने की आशंका है।
बृजभूषण सिंह ने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं क्योंकि धान की कटाई में देरी हो रही है। जैसे-जैसे फसल कटेगी, किसान पराली जलाना शुरू कर सकते हैं। ऐसे में प्रशासन को अभी से प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
--आईएएनएस
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