पैरा खेलों को भी क्रिकेट की तरह पहचान और ध्यान मिलने लगे तो इसमें आगे बढ़ने की बहुत संभावनाएं: कृष्णा नागर
नागोया, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। टोक्यो 2020 पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के कृष्णा नागर ने पैरा-बैडमिंटन के लिए अधिक पहचान और कॉर्पोरेट निवेश की मांग की है। उनका तर्क है कि बेहतर दृश्यता और प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) मिलने से इस खेल में एथलीटों के लिए अवसरों का दायरा काफी बढ़ सकता है।
जापान के आइची-नागोया में जारी एशियन पैरा गेम्स 2026 में शिवराजन सोलाईमलाई के साथ पुरुष युगल (एसएच6) में रजत पदक और नित्या श्री सुमति सिवन के साथ मिश्रित युगल (एसएच6) में कांस्य पदक जीतने के बाद नागर ने सरकार और खेल प्राधिकरणों से मिले समर्थन को तो सराहा, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि पैरा-खेलों को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक उपलब्धियों के अनुरूप अधिक व्यावसायिक (कमर्शियल) ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
2024 के विश्व चैंपियन ने उन रणनीतिक गलतियों पर भी चर्चा की, जिनकी वजह से उन्हें महत्वपूर्ण अंक गंवाने पड़े। उन्होंने 15-अंकों वाले नए फॉर्मेट में ढलने और लॉस एंजिल्स 2028 पैरालंपिक में फिर से शीर्ष स्थान (पोडियम) हासिल करने के अपने दृढ़ संकल्प के बारे में भी बात की।
नागर का मानना है कि भारतीय पैरा-बैडमिंटन के विकास का अगला चरण न केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में किए गए प्रदर्शन पर, बल्कि इस खेल में निवेश करने के लिए प्रायोजकों और बड़ी कंपनियों की इच्छा पर भी निर्भर करेगा। केंद्र सरकार, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और मौजूदा खेल कार्यक्रमों से मिल रहे समर्थन को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि यदि अधिक व्यावसायिक सहयोग मिले, तो इससे और भी पैरा-एथलीटों को अपने करियर को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
'आईएएनएस' के साथ एक विशेष बातचीत में नागर ने कहा, "केंद्र सरकार हमारा बहुत समर्थन करती है। प्रधानमंत्री हमेशा हमारा साथ देते हैं। अन्य खिलाड़ी (जो शारीरिक रूप से सक्षम हैं) भी हमारा समर्थन करते हैं। वे हमारे लिए टॉप्स और पोडियम जैसी अच्छी योजनाएं लेकर आ रहे हैं। केंद्र सरकार हमें और अधिक हासिल करने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करती है और खिलाड़ियों के लिए बहुत कुछ कर रही है। इसलिए, हमें केंद्र सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है।"
हालांकि, नागर का मानना है कि सरकारी सहायता के साथ-साथ जनता का जुड़ाव और कॉर्पोरेट प्रायोजकों की अधिक रुचि भी जरूरी है। क्रिकेट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर पैरा-खेलों को भी उसी स्तर का ध्यान और निवेश मिले, तो इनकी पहुंच काफी बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार से लेकर खेल प्राधिकरण और फंड देने वालों तक, पैरा स्पोर्ट्स और सामान्य खेलों, दोनों के लिए माहौल बहुत सकारात्मक है। हर तरफ से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। सच में। हालांकि, एक बात है: अगर पैरा खेलों को भी क्रिकेट की तरह पहचान और ध्यान मिलने लगे, तो इसमें आगे बढ़ने की बहुत संभावनाएं हैं। 2021 से 2024 के बीच इनमें काफी विकास हुआ है। एशियन गेम्स के बाद इनका और भी विस्तार होना चाहिए।"
"हालांकि, मुझे लगता है कि 2028 तक मुकाबला बहुत कड़ा हो जाएगा। देखा जाए तो, किसी भी पैरा एथलीट के लिए सबसे बड़ी जरूरत पैसा है। अगर पैरा एथलीट और आगे बढ़ते हैं, तो यह बहुत अच्छा होगा। इससे प्रायोजक (स्पॉन्सर) भी मिलेंगे। भारत में कई बड़ी कंपनियां हैं। अगर वे पैरा स्पोर्ट्स को बढ़ावा दें, तो हमारे खेल के लिए बहुत अच्छा होगा, क्योंकि पैरा स्पोर्ट्स में बहुत सारे खिलाड़ी हैं।"
नागर का मानना है कि अधिक निवेश की जरूरत इसलिए है क्योंकि भारतीय पैरा-एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले ही शानदार प्रदर्शन किया है। उनका मानना है कि कमर्शियल सपोर्ट मिलने से इस खेल का इकोसिस्टम मजबूत होगा और जाने-माने खिलाड़ियों के अलावा अन्य एथलीटों के लिए भी बेहतर मौके पैदा होंगे।
उन्होंने कहा, "उदाहरण के लिए मैं पैरा-एथलीटों की श्रेणी में आता हूं। मैं जो भी ट्रेनिंग करता हूं, वह शारीरिक रूप से सक्षम खिलाड़ियों के साथ करता हूं। मैं उनके साथ ट्रेनिंग करता हूं और उनके खिलाफ खेलता हूं, जिससे मुझे काफी फायदा होता है। मैं चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा स्पॉन्सर पैरा-स्पोर्ट्स से जुड़ें, क्योंकि पैरा-स्पोर्ट्स में अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। अगर आप बैडमिंटन और पैरा-बैडमिंटन दोनों को देखें, तो ओलंपिक स्तर पर गोल्ड जीतने वाले केवल प्रमोद भगत और मैं ही हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, पैरा-बैडमिंटन को अभी तक उतनी पहचान नहीं मिली है। आप देखेंगे कि जैवलिन (भाला फेंक) में बहुत अच्छा प्रदर्शन हुआ है, लेकिन पैरा-बैडमिंटन ने उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है, जितना उसे करना चाहिए था। पैरा-बैडमिंटन के नतीजे 7-10 दिनों के भीतर आ जाते हैं। इतने कम समय में सब कुछ बिल्कुल सही तरीके से करना होता है। मुझे उम्मीद है कि मैं 2028 में भी ऐसा ही प्रदर्शन दोहरा सकूंगा। मुझे पूरा यकीन है कि मैं ऐसा कर पाऊंगा और पोडियम पर सबसे ऊपर रहूंगा।"
नागर ने यह बात तब कही है जब वह अगले पैरालंपिक चक्र की ओर देख रहे हैं। टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतने और 2024 में वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद, यह भारतीय शटलर लॉस एंजिल्स 2028 के क्वालिफिकेशन पीरियड (जो 2027 में शुरू होने वाला है) से पहले अपनी फिटनेस बनाए रखने और अपने खेल को और बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
नागर ने कहा, "मैं टोक्यो पैरालंपिक का गोल्ड मेडलिस्ट, 2024 का वर्ल्ड चैंपियन और एशियन गेम्स का सिल्वर मेडलिस्ट हूं। मगर सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि अपनी फिटनेस बनाए रखने के लिए मुझे कितनी ट्रेनिंग करनी पड़ती है। मुझे अपनी फिटनेस को बेहतरीन स्तर पर बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश करनी होगी।"
एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने डबल्स में दो मेडल जीते, लेकिन नागर ने माना कि इन नतीजों से कुछ ऐसी कमियां भी सामने आईं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। पुरुष डबल्स एसएच6 फाइनल में वह और शिवराजन चीन के खिलाफ अपनी रणनीति को ठीक से लागू नहीं कर पाए। उनके बीच तालमेल की कमी का फायदा उठाते हुए, उनके विरोधियों ने अहम मौकों पर खेल पर अपना नियंत्रण बना लिया।
उन्होंने कहा, "जैसा कि आप देख सकते हैं कि डबल्स में कुछ ऐसे मौके आए जब हम आपस में सही तालमेल नहीं बिठा पाए और चीनी खिलाड़ियों ने इसका फायदा उठा लिया। हम रैली के दौरान उन्हें थकाने और लंबी रैलियां खेलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया। हम लगातार कोशिश करते रहे, यह सोचकर कि रैली जितनी लंबी होगी, हमारे लिए उतना ही अच्छा होगा। हमने काफी इंतजार किया—यानी हमने बहुत धैर्य के साथ खेलने की कोशिश की—लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।"
नागर ने कहा कि अपनी निरंतरता सुधारने के लिए इस जोड़ी को कोर्ट पर एक साथ और अधिक समय बिताने की जरूरत होगी। आने वाला क्वालिफिकेशन साइकिल और 2028 की वर्ल्ड चैंपियनशिप उनकी तैयारियों में अहम पड़ाव होंगे। नागर ने कहा, "हालांकि, कोई बात नहीं। लॉस एंजिल्स के लिए क्वालिफिकेशन साल 2027 में शुरू होगा, इसलिए हम अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे। हम जितना हो सके एक साथ ट्रेनिंग करेंगे, क्योंकि उससे पहले 2028 में वर्ल्ड चैंपियनशिप है। हमारा मुख्य फोकस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर होगा।"
नागर के एजेंडे में एक और बड़ा बदलाव 15-प्वाइंट वाले गेम फॉर्मेट को अपनाना है। इस भारतीय शटलर का मानना है कि यह छोटा फॉर्मेट उनके आक्रामक खेल के तरीके के अनुकूल हो सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें खेल की शुरुआत से ही अधिक निर्णायक होना पड़ेगा। 27 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, “15 अंकों वाले गेम में पहले हम शुरुआती तीन-चार अंकों को थोड़ा ढीला रखते थे और रैली के हिसाब से खेलते थे।"
"हालांकि, अब ऐसा करने की जरूरत नहीं है। अब हमें गेम के शुरुआती अंकों पर ही पूरा ध्यान देना होगा। हमें जितनी जल्दी हो सके खेलना होगा, क्योंकि यह 15 अंकों का गेम है। यहां किसी तरह की रियायत की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर आप एक भी अंक गंवा देते हैं, तो स्थिति कभी भी आपके हाथ से निकल सकती है। मेरी कैटेगरी में कोई भी किसी को भी हरा सकता है। मेरा मतलब है कि टॉप आठ या दस खिलाड़ियों में से कोई भी किसी को भी हरा सकता है।”
नागर ने एसएच6 कैटेगरी में बड़े खिताबों के बदलते वितरण को टॉप लेवल पर कड़ी प्रतिस्पर्धा का सबूत बताया। चूंकि अलग-अलग टूर्नामेंटों में अलग-अलग खिलाड़ी चैंपियन बन रहे हैं, इसलिए उनका मानना है कि टॉप दावेदारों में बने रहने के लिए लगातार सुधार करते रहना बहुत जरूरी होगा।
उन्होंने कहा, "मेरी कैटेगरी में 2021 में मैं चैंपियन था। 2024 में फ्रांस का खिलाड़ी चैंपियन बना, और 2024 में ही मैं भी वर्ल्ड चैंपियन बना। 2023 में एशियन चैंपियनशिप में मैंने सिंगल्स में सिल्वर और डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। 2024 में पेरिस में फ्रांस का खिलाड़ी चैंपियन बना। इसके बाद, फरवरी 2026 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में अमेरिका का एक खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियन बना। मुझे लगता है कि इस बार एशियन टीम के मेडलिस्ट भी बदल जाएंगे। मेरी कैटेगरी में अभी भी कोई निरंतरता नहीं है। यह सिलसिला चलता रहेगा। मगर मुझे लगता है कि मैं ही इकलौता ऐसा खिलाड़ी हूं जो सभी टूर्नामेंट जीत सकता हूं। हालांकि, अब मुझे और भी ज्यादा कड़ी मेहनत करनी होगी। मुझे 15-प्वाइंट फॉर्मेट के लिए खुद को जितना हो सके तैयार करना होगा, और यह बेहतर भी है।"
नागर ने यह भी बताया कि मैचों के आखिरी पलों में उनके प्रदर्शन में सुधार की जरूरत है। चीन के खिलाफ अपने सिंगल्स मैच को याद करते हुए उन्होंने कहा कि निर्णायक गेम में एक बड़ी बढ़त होने के बावजूद, अहम मौकों पर की गई गलतियों की वजह से वह जीत हाथ से निकल गई।
"मेरा मुख्य इवेंट सिंगल्स है, और मैं इसमें अच्छा हूं। मैं इसके लिए ट्रेनिंग भी करता हूं, लेकिन मुझे इस बात की थोड़ी निराशा है कि मैं सिंगल्स में नहीं खेल पाया। मैं पूरी तरह फिट था। सब कुछ अच्छा था - मेरा स्टैमिना, फुर्ती, खेल और पावर, सब बढ़िया था। हालांकि, अंत में मुझे कुछ तकनीकी दिक्कतें आईं। आपने चीन के खिलाफ मेरा सिंगल्स मैच देखा होगा। तीसरे सेट में मैं 16–11 से आगे था। उसके बाद, मुझे कुछ दिक्कतें आने लगीं। फिर मैं 19–17 से आगे था, लेकिन उसके बाद मैंने गलतियां करना शुरू कर दिया।"
"अब मुझे लगता है कि मुझे आखिरी चार-पांच प्वाइंट्स के दौरान इन सभी चीजों पर थोड़ा और काम करने की जरूरत है। हालांकि, जैसा कि आप देखेंगे, अगले टूर्नामेंट से सभी मैच 15 प्वाइंट्स के होंगे। मुझे लगता है कि यह मेरे लिए फायदेमंद होगा क्योंकि मैं तेज और दमदार खेल खेलता हूं। 15 प्वाइंट्स तक खेलना मेरे लिए बहुत अच्छा रहेगा, इसलिए मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करूंगा। साथ ही, मैं इन गलतियों को न दोहराने की कोशिश करूंगा। मैंने क्वार्टर-फाइनल और सेमीफाइनल में यही गलतियां करके मैच हारे थे, इसलिए मैं उन्हें दोबारा नहीं दोहराना चाहता। मुझे एशियाई खेलों को लेकर पूरा भरोसा था कि मैं जीतूंगा और एक भी गलती नहीं करूंगा।"
सुमति सिवन के साथ उनके मिक्स्ड डबल्स के सफर से भी कुछ ऐसा ही सबक मिला। भारतीय जोड़ी इंडोनेशिया की रीना मार्लिना और सुभान के खिलाफ अपना सेमीफाइनल हार गई। वह रैलियों को खत्म करने के मौकों को भुना नहीं पाए, जिसका फायदा उठाकर उनके विरोधियों ने अपनी लय बना ली।
उन्होंने कहा, "जब हमारे पास शटल को खत्म करने का मौका था, तो दो-तीन बार ऐसा हुआ कि हम प्वाइंट नहीं ले पाए। मैंने शटल को डिफेंड किया, जो असल में हमारा प्वाइंट होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने उसे डिफेंड कर लिया। इसके बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया और उन्होंने अपने खेल में थोड़ा बदलाव किया। मैंने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन मुझसे एक छोटी सी गलती हो गई, जिसका उन्होंने फायदा उठा लिया।"
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अगले चरण की तैयारी कर रहे नागर के लिए अपनी तकनीक को बेहतर बनाना और दबाव के बीच सकारात्मक सोच बनाए रखना बहुत जरूरी होगा। उन्होंने कहा, "तकनीकी सुधार का सीधा सा मतलब यह है कि आप खेल को जितना सकारात्मक होकर खेलेंगे और अपने कोर्ट में जितनी समझदारी और बारीकी से खेलेंगे, उतना ही बेहतर होगा। आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा और हर एक पॉइंट के लिए पूरी जान लगा देनी होगी।"
लॉस एंजिल्स क्वालिफिकेशन साइकिल के करीब आने के साथ नागर के सामने दो लक्ष्य हैं: एक तो फिर से पोडियम के शीर्ष पर पहुंचना, और दूसरा भारतीय पैरा-बैडमिंटन को वह पहचान दिलाना जिसके वह अपनी उपलब्धियों के दम पर हकदार हैं। पैरालंपिक चैंपियन के लिए इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर कमर्शियल सपोर्ट और कोर्ट पर और भी शानदार प्रदर्शन करना बहुत जरूरी है।"
--आईएएनएस
एसएम/डीकेपी

