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पेपर लीक पर कांग्रेस पहले अपने शासनकाल का जवाब दे : अरुण चतुर्वेदी

पेपर लीक पर कांग्रेस पहले अपने शासनकाल का जवाब दे : अरुण चतुर्वेदी
पेपर लीक पर कांग्रेस पहले अपने शासनकाल का जवाब दे : अरुण चतुर्वेदी

जयपुर, 24 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने पेपर लीक के मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि संसद में पेश किया गया नया विधेयक पूरी तरह छात्रों के हित में है और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं से मुक्त बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही है और अब राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

अरुण चतुर्वेदी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी, अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा को पहले अपने शासनकाल की घटनाओं का जवाब देना चाहिए। राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान रीट (राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा), सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे लगभग 70 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। उस समय राज्य सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय परीक्षा बोर्ड पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की थी।"

उन्होंने कहा, "आज जब केंद्र सरकार पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की दिशा में कदम उठा रही है, तब कांग्रेस इस विषय पर राजनीति कर रही है। संसद का सत्र चल रहा है और विपक्ष यदि वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे सदन में इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। बेबुनियाद मांगें उठाने और संसद की कार्यवाही बाधित करने से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।"

डॉ. चतुर्वेदी ने कांग्रेस द्वारा छात्र आंदोलन को दिए जा रहे समर्थन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जब जंतर-मंतर परसीजेपी का धरना चल रहा था, उस दौरान कांग्रेस के बड़े नेता वहां मौजूद नहीं थे। राहुल गांधी उस समय विदेश में थे और कांग्रेस नेतृत्व आंदोलन से दूरी बनाए हुए था। अब जब आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने लगा है, तब कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है।"

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री हमेशा छात्रों के भविष्य को लेकर संवेदनशील रहे हैं। जहां भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, वहां सरकार ने तुरंत परीक्षा रद्द कराई, जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी और पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित कराई। केंद्र सरकार की नीति स्पष्ट है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।"

उन्होंने कहा, "प्रस्तावित कानून में पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। यह स्पष्ट संदेश है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है और सरकार परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।"

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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