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पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी मामले में दो कंपनियों और 6 लोगों को ठहराया दोषी, सुनाई सजा

पंचकूला, 15 जनवरी (आईएएनएस)। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 152 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में दो निजी कंपनियों और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने 13 जनवरी 2026 को सजा सुनाई, जबकि दोषसिद्धि का फैसला 22 दिसंबर 2025 को दिया गया था।
पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी मामले में दो कंपनियों और 6 लोगों को ठहराया दोषी, सुनाई सजा

पंचकूला, 15 जनवरी (आईएएनएस)। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 152 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में दो निजी कंपनियों और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने 13 जनवरी 2026 को सजा सुनाई, जबकि दोषसिद्धि का फैसला 22 दिसंबर 2025 को दिया गया था।

यह मामला केनरा बैंक, करनाल (हरियाणा) की शिकायत पर 14 जुलाई 2020 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि आरोपी व्यक्तियों ने मिलकर बैंक को धोखा दिया। उन्होंने धोखाधड़ी से 152 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट/ऋण हासिल किया और फंड को लोन के निर्धारित उद्देश्य के अलावा अन्य कामों में इस्तेमाल कर दिया।

जांच में पाया गया कि दो कंपनियां एम/एस एसआरएस रियल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और एम/एस एसआरएस रियल एस्टेट लिमिटेड ने अपने निदेशकों के जरिए बैंक को क्रमशः 41.95 करोड़ रुपए और 93.20 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया। इन कंपनियों ने धोखे से 42 करोड़ रुपए और 110 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट ली और फंड को डमी कंपनियों के जरिए बिना किसी वास्तविक कारोबार के डायवर्ट कर दिया।

सीबीआई ने जांच पूरी होने के बाद 31 दिसंबर 2022 को दो चार्जशीट दाखिल कीं। ट्रायल के दौरान सबूतों के आधार पर अदालत ने दोनों कंपनियों और छह व्यक्तियों, राजेश सिंगला, अनिल जिंदल, बिशन बंसल, नानक चंद तायल, सीमा नारंग और धीरज गुप्ता, को दोषी करार दिया।

सजा के तौर पर अदालत ने दोनों कंपनियों पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया। व्यक्तिगत आरोपियों में राजेश सिंगला और अनिल जिंदल को पांच साल की कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 1.2 लाख रुपए का जुर्माना, बिशन बंसल और नानक चंद तायल को पांच साल की कठोर कारावास और प्रत्येक पर 80,000 रुपए का जुर्माना, जबकि सीमा नारंग और धीरज गुप्ता को चार साल की कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 40,000 रुपए का जुर्माना सुनाया गया।

यह फैसला बैंक धोखाधड़ी के खिलाफ सीबीआई की सख्त कार्रवाई का हिस्सा है, जो दिखाता है कि फर्जी दस्तावेजों और फंड के दुरुपयोग से बैंक को होने वाले नुकसान पर अब सख्ती से निपटा जाएगा। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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