पंचामृत पूजन और आभूषण से बाबा महाकाल का शृंगार, भव्य भस्म आरती की गई
उज्जैन, 12 जून (आईएएनएस)। श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष द्वादशी) को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। भगवान महाकाल को फूलों से सजा कर भव्य शृंगार किया गया।
तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, "जय श्री महाकाल" के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।
मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुण्ड लगाकर राजा स्वरूप में शृंगार किया गया।
मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही बाबा के दर्शन करने के लिए उमड़े थे।
कहा जाता है कि महाकाल को पहले श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में मशहूर है, जिसे देखने के लिए जनसमान्य से लेकर बड़ी हस्तियां भी आती हैं।
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