Samachar Nama
×

पाली के ‘जय-वीरू’ की दोस्ती अमर: दोस्त की मौत के 12 घंटे बाद दूसरे ने भी तोड़ा दम

पाली के ‘जय-वीरू’ की दोस्ती अमर: दोस्त की मौत के 12 घंटे बाद दूसरे ने भी तोड़ा दम

राजस्थान के पाली से दोस्ती की मिसाल पेश करने वाली एक भावुक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। स्कूल से शुरू हुई दो दोस्तों की दोस्ती श्मशान तक साथ निभा गई। पाली के लोगों के बीच ‘जय-वीरू’ के नाम से मशहूर इन दोस्तों में से एक की मौत के महज 12 घंटे बाद दूसरे दोस्त ने भी दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

बताया जा रहा है कि दोनों दोस्तों की दोस्ती बचपन से थी। स्कूल के दिनों से शुरू हुआ साथ उम्रभर बना रहा। लोग उन्हें प्यार से ‘जय-वीरू’ कहकर बुलाते थे, क्योंकि दोनों हर वक्त साथ नजर आते थे। सुख-दुख, काम-काज और सामाजिक जीवन—हर मोड़ पर दोनों की दोस्ती मिसाल मानी जाती थी।

जानकारी के अनुसार एक दोस्त की तबीयत बिगड़ने के बाद उसका निधन हो गया। इस दुखद खबर ने दूसरे दोस्त को अंदर तक तोड़ दिया। परिजनों और ग्रामीणों के मुताबिक वह अपने दोस्त की मौत का सदमा सह नहीं पाया।

सबसे भावुक कर देने वाली बात यह रही कि पहले दोस्त की मौत के करीब 12 घंटे बाद दूसरे दोस्त ने भी अंतिम सांस ले ली। लोगों का कहना है कि जैसे दोस्ती ने जीवनभर साथ निभाया, वैसे ही मौत में भी दोनों ने साथ नहीं छोड़ा।

दोनों दोस्तों की मौत की खबर से पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। ग्रामीणों ने इसे दोस्ती की ऐसी मिसाल बताया, जो शायद ही कभी देखने को मिले।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों की दोस्ती सिर्फ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक-दूसरे के बिना जीवन की कल्पना भी मुश्किल थी। यही कारण है कि एक के जाने के बाद दूसरा भी ज्यादा देर तक खुद को संभाल नहीं सका।

‘जय-वीरू’ की इस कहानी ने लोगों को मशहूर फिल्मी दोस्ती की याद दिला दी, लेकिन यह कहानी पर्दे की नहीं बल्कि हकीकत की है। दोनों दोस्तों का एक-दूसरे के प्रति लगाव और समर्पण अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

गांव में हर कोई इस घटना को भावुक होकर याद कर रहा है। लोग कह रहे हैं कि ऐसी दोस्ती किस्मत वालों को ही नसीब होती है। स्कूल से शुरू हुआ रिश्ता श्मशान तक पहुंचा और दोस्ती की मिसाल बन गया।

पाली की यह कहानी सिर्फ दो दोस्तों की मौत की खबर नहीं, बल्कि दोस्ती, भावनाओं और अटूट रिश्ते की ऐसी दास्तां है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। ‘जय-वीरू’ अब भले इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी दोस्ती हमेशा याद रखी जाएगी।

Share this story

Tags