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पाकिस्तान की 'फेयरनेस क्रीम' बनी जानलेवा? नागपुर में महिलाओं की किडनी पर असर से मचा हड़कंप

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नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर पाकिस्तान में निर्मित एक फेयरनेस क्रीम के इस्तेमाल के बाद कई महिलाओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने का दावा किया गया है। प्रारंभिक जांच में कुछ मरीजों की किडनी प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। इस घटना ने न केवल कॉस्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि प्रतिबंधित या अनधिकृत विदेशी उत्पाद भारतीय बाजार तक कैसे पहुंच रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नागपुर के एक सरकारी मेडिकल संस्थान में पिछले कुछ समय के दौरान कई ऐसी महिलाएं इलाज के लिए पहुंचीं, जिनमें किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं पाई गईं। डॉक्टरों ने जब मरीजों का चिकित्सा इतिहास खंगाला तो सामने आया कि कई महिलाएं लंबे समय से एक ही तरह की स्किन व्हाइटनिंग या फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल कर रही थीं। जांच के दौरान इस क्रीम का संबंध पाकिस्तान में निर्मित एक उत्पाद से जोड़ा गया।


विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि संबंधित क्रीम में पारा (Mercury) जैसी जहरीली धातु की मात्रा अधिक हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, लंबे समय तक पारा युक्त कॉस्मेटिक उत्पादों का उपयोग करने से किडनी, तंत्रिका तंत्र और त्वचा पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। हालांकि संबंधित उत्पाद की प्रयोगशाला जांच और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि त्वचा को गोरा करने वाली कुछ अवैध या बिना प्रमाणन वाली क्रीमों में पारा, स्टेरॉयड और अन्य हानिकारक रसायनों का उपयोग किया जाता है। शुरुआत में ये उत्पाद त्वचा पर असर दिखाते हैं, लेकिन लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। डॉक्टरों ने लोगों को केवल प्रमाणित और लाइसेंस प्राप्त उत्पादों का ही उपयोग करने की सलाह दी है।

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि यदि संबंधित क्रीम पाकिस्तान में बनी है, तो वह भारतीय बाजार तक कैसे पहुंची। कुछ लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अनधिकृत विक्रेताओं की भूमिका की जांच की मांग की, जबकि अन्य ने सीमा पार से आने वाले उत्पादों की निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनब्रांडेड, बिना लाइसेंस या संदिग्ध कॉस्मेटिक उत्पाद का इस्तेमाल न करें। यदि किसी क्रीम के उपयोग के बाद त्वचा पर जलन, एलर्जी, सूजन या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और उत्पाद का उपयोग बंद कर दें।

कॉस्मेटिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्किन केयर उत्पाद को खरीदने से पहले उसके निर्माता, लाइसेंस, सामग्री (Ingredients) और गुणवत्ता प्रमाणन की जांच करना बेहद जरूरी है। केवल कम कीमत या त्वरित परिणाम के लालच में अज्ञात उत्पादों का उपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।

फिलहाल संबंधित स्वास्थ्य संस्थान और अधिकारी पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। यदि प्रयोगशाला जांच में हानिकारक रसायनों की पुष्टि होती है, तो संबंधित उत्पाद के वितरण और बिक्री की जांच भी की जा सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि यह क्रीम किन माध्यमों से बाजार तक पहुंची।

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