पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ का दावा, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता 24 घंटे में ले सकता है अंतिम रूप'
इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौता अगले 24 घंटों में अंतिम रूप ले सकता है। उन्होंने ई-साइनिंग की तैयारियों का भी जिक्र किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शहबाज शरीफ ने अपने संदेश में कहा, “हम पहले से कहीं अधिक शांति समझौते के करीब हैं।” उन्होंने बताया कि पाकिस्तान इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (ई-साइनिंग) की तैयारी कर रहा है, जिसके बाद तकनीकी स्तर की वार्ताएं आगे बढ़ेंगी।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने वार्ता प्रक्रिया में सहयोग के लिए अमेरिका और ईरान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की वार्ता के दौरान जारी प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं। साथ ही क्षेत्र के अपने भाई देशों के समर्थन के लिए भी उनका धन्यवाद करते हैं।”
शरीफ ने विश्वास जताया कि यह “ऐतिहासिक शांति समझौता” क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव साबित होगा।
हालांकि, समझौते के अंतिम मसौदे, उसकी शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में समझौते के आधिकारिक रूप से लागू होने तक स्थिति पर नजर बनी हुई है।
शनिवार को ही ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के विचारों को तस्नीम न्यूज एजेंसी ने प्रकाशित किया। इसमें उन्होंने दो चरणों में समझौते की ओर इशारा किया। अराघची ने बताया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना, जारी संघर्ष को खत्म करना और अमेरिका-ईरान का एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल न देने का वादा शामिल है। उन्होंने बताया कि समझौते के मसौदे में 14 बिंदु हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत दूसरे चरण में होगी, जो 60 दिनों तक चलेगी।
उन्होंने आगे कहा, "होर्मुज स्ट्रेट का संचालन अब युद्ध से पहले जैसा नहीं रहेगा। इस अहम जलमार्ग पर ईरान और ओमान का अधिकार है और ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।"
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित युद्धविराम (सीजफायर) समझौते में ईरान की जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से मुक्त करने का प्रावधान शामिल है। हालांकि, समझौते के अंतिम स्वरूप और संपत्तियों की रिहाई की शर्तों पर अभी भी बातचीत जारी है। वहीं, होर्मुज को लेकर दोहराया कि प्रशासन अब युद्ध-पूर्व व्यवस्था के तहत नहीं चलेगा और यहां प्रदान की जाने वाली सेवाओं के लिए शुल्क वसूला जाएगा।
अराघची ने कहा, "होर्मुज प्रशासन युद्ध से पहले की स्थिति में वापस नहीं जाएगा।" उन्होंने संकेत दिया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नई प्रशासनिक और सेवा संबंधी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
--आईएएनएस
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