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पीएसीएल सामूहिक निवेश घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क

नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय–2 ने पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी इकाइयों द्वारा संचालित बहुचर्चित सामूहिक निवेश योजना से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 1,986.48 करोड़ रुपए की 37 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ये संपत्तियां पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में स्थित हैं। ईडी की ओर से सोमवार को जारी एक प्रेस नोट में यह जानकारी दी गई।
पीएसीएल सामूहिक निवेश घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क

नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली जोनल कार्यालय–2 ने पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी इकाइयों द्वारा संचालित बहुचर्चित सामूहिक निवेश योजना से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 1,986.48 करोड़ रुपए की 37 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ये संपत्तियां पंजाब के लुधियाना और राजस्थान के जयपुर में स्थित हैं। ईडी की ओर से सोमवार को जारी एक प्रेस नोट में यह जानकारी दी गई।

ईडी की ओर से जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार, यह कार्रवाई सीबीआई, नई दिल्ली द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। इस एफआईआर में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपित संस्थाओं और व्यक्तियों ने अवैध सामूहिक निवेश योजना के जरिए देशभर के लाखों निवेशकों से 60 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि धोखाधड़ी से जुटाई। निवेशकों को कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर कैश डाउन पेमेंट और किस्तों (इंस्टॉलमेंट) के जरिए निवेश के लिए प्रेरित किया गया। उनसे भ्रामक दस्तावेजों, जैसे समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कागजात, पर हस्ताक्षर कराए गए।

जांच में यह खुलासा हुआ कि अधिकांश मामलों में निवेशकों को कोई जमीन नहीं दी गई और लगभग 48 हजार करोड़ की राशि आज भी निवेशकों को लौटाई जानी बाकी है। इस घोटाले में कई फ्रंट कंपनियों और रिवर्स सेल ट्रांजैक्शनों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी को छिपाया गया और अवैध लाभ कमाया गया।

ईडी की जांच के अनुसार, निवेशकों से जुटाई गई राशि को विभिन्न संबंधित और असंबंधित कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया और अंततः स्वर्गीय निर्मल सिंह भंगू, उनके परिवार के सदस्यों, करीबी सहयोगियों और पीएसीएल से जुड़ी संस्थाओं के बैंक खातों में जमा कराया गया। बाद में इसी धन का उपयोग उनके नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया।

मामले में जांच के दौरान स्वर्गीय निर्मल सिंह भंगू की पत्नी प्रेम कौर, बेटियां बरींदर कौर और सुखविंदर कौर, दामाद गुरप्रताप सिंह और करीबी सहयोगी प्रतीक कुमार के खिलाफ खुले गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। ईडी ने वर्ष 2016 में इस मामले में ईसीआईआर दर्ज की थी और 2018 में अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसके बाद 2022 और 2025 में दो अनुपूरक अभियोजन शिकायतें भी दायर की गईं। माननीय विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने अब तक दायर सभी अभियोजन शिकायतों का संज्ञान ले लिया है।

ईडी के अनुसार, हाल ही में कुर्क की गई 37 संपत्तियां निवेशकों के धन से खरीदी गई थीं और इसलिए इन्हें अपराध की आय माना गया है। इस कार्रवाई के साथ ही ईडी अब तक देश और विदेश में स्थित चल-अचल संपत्तियों सहित लगभग 7,589 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

पआईएम/पीएसके

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