पांचवीं बार विश्वनाथन आनंद बने थे चैंपियन, बोरिस गेलफैंड को हराकर हासिल की बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। कुछ खिलाड़ी अपनी काबिलियत से खेल को ही मशहूर बना देते हैं। शतरंज के खेल में ऐसा ही एक दिग्गज खिलाड़ी भारत को भी मिला। नाम विश्वनाथन आनंद। आनंद ने अपने हुनर के दम पर भारत में उस खेल को पहचान दिलाई, जिसके बारे में एक समय पर शायद ही कोई बातचीत होती थी। आनंद पांच बार विश्व चैंपियन बने और वह खेल रत्न पाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी हैं।
हालांकि, विश्वनाथन आनंद के लिए 30 मई की तारीख बेहद मायने रखती है। साल 2012 में इसी तारीख को आनंद शतरंज की दुनिया में पांचवीं बार बेताज बादशाह बने थे। मॉस्को में विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने इसराइल के बोरिस गेलफैंड को मैराथन मुकाबले में हराया था। आनंद और गेलफैंड के बीच शुरुआती 12 गेम 6-6 से ड्रॉ रहे थे, जिसके बाद खिताबी मुकाबले का नतीजा टाईब्रेकर की मदद से हुआ था। टाईब्रेकर में आनंद ने 2.5 और 1.5 के अंतर से गेलफैंड को मात दी थी।
खिताबी मुकाबले में आनंद और गेलफैंड के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। 33 चालों तक चला टाईब्रेकर का पहला गेम ड्रॉ रहा था। वहीं, दूसरे गेम में आनंद ने गेलफैंड को 77 चालों के बाद शिकस्त दी थी। वहीं, अगले दो गेम ड्रॉ खेलने के बाद आनंद ने विश्व चैंपियन बनने का तमगा हासिल किया था। आनंद लगातार तीसरी बार अपने खिताब का बचाव करने में सफल रहे थे। वहीं, उन्होंने करियर का पांचवां और लगातार चौथा खिताब जीता था। आनंद ने अपना पहला खिताब साल 2000 में जीता था। इसके बाद वह 2007,2008, 2010 में लगातार तीन बार वर्ल्ड चैंपियन बने।
विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर भी हैं। उन्होंने महज 18 साल की उम्र में 1988 में यह उपलब्धि हासिल की थी। इससे एक साल पहले यानी 1987 में आनंद विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप जीतने वाले पहले एशियाई खिलाड़ी बने। आनंद को शतरंज के खेल में महत्वपूर्ण योगदान के लिए साल 1991/92 में राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें पद्म विभूषण,पद्म भूषण और पद्म श्री से भी नवाजा जा चुका है।
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