ओवैसी पहले अपनी पार्टी का अध्यक्ष हिजाब वाली महिला को बनाकर दिखाइए: सुधांशु त्रिवेदी
नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हिजाब वाली महिला को एक दिन प्रधानमंत्री बनने संबंधी बयान पर सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस मुद्दे पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने का सपना फिलहाल सपना ही रहने वाला है। पहले वह अपनी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी हिजाब पहनने वाली महिला को बनाकर दिखाइए।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने ओवैसी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि दुनिया के कई मुस्लिम देशों में महिलाएं प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति रह चुकी हैं, लेकिन उनमें से कितनी महिलाओं को बुर्का पहने देखा गया है, यह एक बड़ा सवाल है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश में बेगम खालिदा जिया और शेख हसीना दोनों प्रधानमंत्री रह चुकी हैं, लेकिन वे आमतौर पर बुर्के में नजर नहीं आईं। इसी तरह उन्होंने पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और इंडोनेशिया की पूर्व प्रधानमंत्री मेघावती सुकर्णोपुत्री का भी जिक्र करते हुए कहा कि इन उदाहरणों से ओवैसी के बयान की वास्तविकता पर सवाल खड़े होते हैं।
सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि ओवैसी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनका मुस्लिम परंपरा को लेकर जो नजरिया है, वह पैगंबर मोहम्मद के वंश से कैसे मेल खाता है और सऊदी अरब तथा जॉर्डन जैसे देशों के शाही परिवार, जो खुद को उस वंशावली से जोड़ते हैं, उसमें कहां फिट बैठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो काम दुनिया के बड़े-बड़े मुस्लिम देश नहीं कर रहे हैं और जिन देशों में पैगंबर मोहम्मद साहब के वंश से जुड़े शासक हैं, वहां भी इस तरह की परंपराएं नहीं दिखतीं, लेकिन भारत में ओवैसी और इंडी गठबंधन के कई नेता इसी मुद्दे पर सियासत करने में जुटे हुए हैं।
भाजपा सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनने का सपना फिलहाल सपना ही रहने वाला है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि पहले हकीकत में कुछ करके दिखाइए और अपनी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी हिजाब पहनने वाली महिला को बनाकर दिखाइए, तब यह समझ में आएगा कि ओवैसी की बातों में कितनी सच्चाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी की राजनीति में मुस्लिम महिलाओं के प्रति वास्तविक संवेदना कम और राजनीतिक स्वार्थ अधिक नजर आता है।
इस दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने अखिलेश यादव की एसआईआर के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर इंडिया गठबंधन की स्थिति बेहद उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की हालत यह हो गई है कि वे न खुलकर बोल पा रहे हैं और न ही चुप रह पा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ दिन पहले अखिलेश यादव कह रहे थे कि भाजपा के वोट कट रहे हैं, जबकि कांग्रेस यह दावा कर रही थी कि एसआईआर के कारण विपक्ष के वोट कट रहे हैं। अब वही नेता कह रहे हैं कि एसआईआर वोट काटने के लिए नहीं, बल्कि वोट जोड़ने के लिए है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एक दिन विपक्ष यह दावा करता है कि उनके कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंटों ने अपने वोट सुरक्षित कर लिए हैं और अगले ही दिन यह आरोप लगाया जाता है कि भाजपा अपने वोट पक्के कर रही है। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि न किसी के वोट कट रहे हैं और न ही किसी के वोट जुड़ रहे हैं। यह पूरी तरह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसे तकनीकी और व्यावसायिक दक्षता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि 'पलभर में तोला और पलभर में माशा' जैसी हो गई है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में गंभीरता और जागरूकता के साथ सहयोग करें, न कि भ्रम फैलाकर जनता को गुमराह करें।
--आईएएनएस
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