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लोकसभा सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर विपक्ष का विरोध, वीडियो में जानें खड़गे ने बुलाई बैठक, परिसीमन के खिलाफ बिल पर आज होगी चर्चा 

लोकसभा सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर विपक्ष का विरोध, वीडियो में जानें खड़गे ने बुलाई बैठक, परिसीमन के खिलाफ बिल पर आज होगी चर्चा

केंद्र सरकार के लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष इस प्रस्ताव का विरोध करेगा। बुधवार को खड़गे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनी।

इस बैठक में राहुल गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। इनमें तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बैठक में सरकार के प्रस्तावित विधेयकों और उनकी संभावित राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा की गई।

बैठक के बाद खड़गे ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक फायदे के लिए आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है। खड़गे के अनुसार, इसी कारण विपक्ष ने परिसीमन विधेयक का विरोध करने का निर्णय लिया है और संसद में इसके खिलाफ वोट करेगा।

केंद्र सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2026 शामिल हैं।

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती है। इस विस्तार के साथ ही लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रतिनिधित्व को अधिक समावेशी बनाने और जनसंख्या के अनुसार सीटों का संतुलन स्थापित करने के लिए जरूरी है।

हालांकि विपक्ष का मानना है कि इस तरह का बड़ा बदलाव बिना व्यापक सहमति के लागू करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। विपक्षी दलों को आशंका है कि परिसीमन के जरिए राजनीतिक समीकरण बदले जा सकते हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों और दलों को नुकसान हो सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद में तीखी बहस का कारण बन सकता है। विशेष सत्र के दौरान इन विधेयकों पर चर्चा और मतदान के समय सरकार और विपक्ष के बीच सीधा टकराव देखने को मिल सकता है।

अब सभी की नजरें संसद के विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है या विपक्ष के विरोध के चलते इसमें बदलाव किए जाते हैं।

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