CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष ला सकता है तीसरा प्रस्ताव, वीडियो में ओम बिरला बोले- नोटिस मिला तो नियमों के तहत करेंगे विचार
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर सियासी हलचल तेज हो सकती है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि अगर विपक्ष ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नया प्रस्ताव लाता है, तो उस पर नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा।
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष अब तक दो बार नोटिस दे चुका है। पहली बार लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए नोटिस खारिज कर दिए गए थे। वहीं, दूसरी बार राज्यसभा में दिए गए नोटिस पर फैसला होना अभी बाकी है। ऐसे में यदि विपक्ष तीसरी बार प्रस्ताव लाता है, तो इस मुद्दे पर संसद में फिर चर्चा हो सकती है।
विशेष सत्र में तीसरी बार प्रस्ताव ला सकता है विपक्ष
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। हालांकि, सत्र की तारीख और एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। विपक्ष इस संभावित सत्र में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव फिर से पेश कर सकता है।
विपक्ष और कई संगठन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन भी हुए हैं।विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल हैं। हालांकि, इन आरोपों और चुनाव आयोग के रुख को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी आरोप के आधार पर अपने आप अनियमितता साबित नहीं होती।
पहली बार दोनों सदनों में खारिज हुए थे नोटिस
ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से पहले भी संसद में नोटिस दिए जा चु हैं। पहली बार लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए थे। इसके बाद राज्यसभा में दूसरी बार नोटिस दिया गया, जिस पर फैसला लंबित बताया गया है।अब संभावित तीसरे प्रस्ताव को लेकर ओम बिरला के बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि नया नोटिस मिलने पर निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के मुताबिक उसकी जांच की जाएगी। इसका मतलब यह है कि प्रस्ताव आने की स्थिति में पहले उसकी स्वीकार्यता और प्रक्रियागत पहलुओं पर विचार होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पद से हटाया जा सकता है।इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ता पारितहोना जरूरी है। प्रस्ताव को उसी सत्र में दोनों सदनों से आवश्यक बहुमत के साथ मंजूरी मिलनी चाहिए। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं।इस प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और मुख्य चुनाव आयुक्त के पद की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए किसी प्रस्ताव का नोटिस देना और वास्तव में पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी होना दो अलग-अलग चरण हैं।
SIR विवाद के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव
SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का मुद्दा फिर चर्चा में है। विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि किसी भी प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई संसद के नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही होगी।फिलहाल, तीसरा प्रस्ताव लाए जाने की संभावना पर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि विपक्ष औपचारिक नोटिस देता है, तो उसके बाद ही यह तय होगा कि प्रस्ताव पर संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे विचार किया जाएगा या नहीं।

