Samachar Nama
×

ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ: भारतीय सेना ने गन हिल पहुंचकर कारगिल वीरों को किया नमन

ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ: भारतीय सेना ने गन हिल पहुंचकर कारगिल वीरों को किया नमन
ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ: भारतीय सेना ने गन हिल पहुंचकर कारगिल वीरों को किया नमन

द्रास, 13 जुलाई (आईएएनएस)। ऑपरेशन विजय की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय सेना ने द्रास स्थित महत्वपूर्ण सैन्य स्थल गन हिल (प्वाइंट 5140) तक एक विशेष अभियान आयोजित किया। यह स्थान द्रास क्षेत्र पर नजर रखने वाला एक महत्वपूर्ण सामरिक बिंदु है और द्रास-कारगिल राष्ट्रीय राजमार्ग से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

भारतीय सेना ने बताया कि इस अभियान का आयोजन 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों द्वारा दिखाए गए साहस, बलिदान और सैन्य कौशल को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया।

प्वाइंट 5140 का ऑपरेशन विजय के इतिहास में विशेष महत्व है। यह ऊंचाई वाला क्षेत्र युद्ध के दौरान दुश्मन का एक प्रमुख ठिकाना और निगरानी केंद्र था। इस स्थान पर कब्जा करना द्रास क्षेत्र पर नियंत्रण मजबूत करने और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों को रोकने के लिए बेहद जरूरी था।

कारगिल युद्ध के दौरान प्वाइंट 5140 की लड़ाई सबसे निर्णायक अभियानों में से एक थी। इस अभियान में भारतीय सेना ने तोपखाने और पैदल सेना के बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया। प्वाइंट 5140 पर अंतिम हमले से पहले सेना ने आसपास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर मजबूत आधार तैयार किया था।

13-14 जून 1999 की रात 18 ग्रेनेडियर्स ने ‘हम्प’ नामक महत्वपूर्ण क्षेत्र पर कब्जा किया। इसके बाद 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने दो बोफोर्स तोपों की मदद से ‘रॉकी नॉब’ क्षेत्र पर हमला कर उसे अपने नियंत्रण में लिया। सटीक तोपखाने की कार्रवाई से दुश्मन के तीन बंकर और कई ठिकाने नष्ट किए गए, जिससे सेना को आगे बढ़ने में सफलता मिली।

प्वाइंट 5140 पर अंतिम हमला 19-20 जून 1999 की रात शुरू किया गया। इस दौरान ‘शत्रुनाश’ नामक व्यापक तोपखाना अभियान चलाया गया, जिसमें बोफोर्स तोपों और मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर समेत कई तोपखाना इकाइयों ने हिस्सा लिया। दोनों दिशाओं से की गई लगातार गोलाबारी ने दुश्मन की रक्षा क्षमता को काफी कमजोर कर दिया।

तोपखाने की कार्रवाई के बाद पैदल सेना ने अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते हुए अद्भुत साहस और पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया। 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने 20 जून 1999 की सुबह 5 बजे तक प्वाइंट 5140 पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही आसपास के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर भी नियंत्रण स्थापित किया गया, जिससे द्रास सेक्टर में दुश्मन की एक बड़ी रक्षा व्यवस्था टूट गई।

भारतीय सेना के अनुसार, इस युद्ध की एक ऐतिहासिक उपलब्धि यह थी कि करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित भारी सुरक्षा वाले इस लक्ष्य को बिना किसी अपने सैनिक की जान गंवाए हासिल किया गया। यह उपलब्धि भारतीय तोपखाने की सटीकता, ताकत और प्रभावशीलता को दर्शाती है।

कारगिल युद्ध में तोपखाने की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए वर्ष 2023 में प्वाइंट 5140 का नाम बदलकर ‘गन हिल’ रखा गया। यह अभियान युद्ध में शामिल सभी वीर सैनिकों के सम्मान और उनके बलिदान की याद को बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।

इस अभियान में ऑपरेशन विजय 1999 के दौरान तोपखाना अभियानों में शामिल रही इकाइयों के 25 सैनिकों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा स्थानीय सैन्य इकाइयों के 101 जवानों ने भी अभियान में भाग लिया। पूर्व सैनिकों और वर्तमान जवानों की संयुक्त भागीदारी ने सेना की परंपरा और गौरव को दर्शाया।

भारतीय सेना ने कहा कि गन हिल अभियान केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि स्मरण, सम्मान और प्रेरणा की यात्रा है। यह भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस को नमन करता है और ऑपरेशन विजय में भारतीय तोपखाने की निर्णायक भूमिका को याद करते हुए आने वाली पीढ़ियों को साहस, कर्तव्य, निस्वार्थ सेवा और देशभक्ति के मूल्यों से प्रेरित करता है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

Share this story

Tags