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ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों व समय पर अंजाम दिया: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक स्तर पर स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत आतंकी हमले होने की स्थिति में अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता से बंधा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने निर्णायक कार्रवाई के माध्यम से अपनी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।
ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों व समय पर अंजाम दिया: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक स्तर पर स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत आतंकी हमले होने की स्थिति में अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता से बंधा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने निर्णायक कार्रवाई के माध्यम से अपनी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में यह बात कही। उन्होंने कहा, सरकार का दृढ़ रुख है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद के किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खतरे के खिलाफ सरकार के दृढ़ रुख का प्रमाण बताया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान, हमने पूरी सटीकता के साथ केवल उन्हीं लोगों को निशाना बनाया, जिन्होंने हम पर हमला किया था।

रक्षा मंत्री ने कहा, “हमने ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका, क्योंकि हमारी क्षमताएं खत्म हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर रोका। हम लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष को जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता है और अचानक संकट के क्षणों में अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति भी है।”

राजनाथ सिंह ने कहा, “आतंकवाद विकृत और कुटिल मानसिकता से उपजता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूलभूत मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ लड़ाई है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश और विदेश दोनों जगह व्यक्त किया है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक आतंकवाद सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि के लिए खतरा बना रहेगा, रक्षामंत्री ने कहा, “आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उसे जायज ठहराने की कोशिश की जाती है। यह बेहद खतरनाक है और एक तरह से आतंकवादियों को अपने लक्ष्य की ओर धीरे-धीरे बढ़ने में मदद करता है। आतंकवाद सिर्फ राष्ट्रविरोधी कृत्य नहीं है। इसके कई आयाम हैं - परिचालन, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों से निपटें।”

राजनाथ सिंह ने कहा, “भारत और पाकिस्तान दोनों को एक ही समय में स्वतंत्रता मिली। हालांकि, आज भारत को वैश्विक स्तर पर आईटी यानी सूचना प्रौद्योगिकी के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार की आईटी यानी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र माना जाता है।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने एक एकीकृत योजना के तहत मिलकर काम किया। इससे यह साबित हुआ कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-थलग नहीं है बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है। रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि यह ऑपरेशन मात्र 72 घंटों में पूरा हो गया, लेकिन इससे पहले की तैयारियां व्यापक और लंबी थीं।

उन्होंने कहा, “कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि है। हम इन मानकों को पार करने के अपने प्रयासों को और आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यूरोप भर की प्रमुख कंपनियां हमारी निजी रक्षा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, यह भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति न केवल उसकी सैन्य शक्ति से, बल्कि प्रतिरोध स्थापित करने की क्षमता से भी मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई को हर जगह अत्यंत प्रभावी ढंग से तैनात किया गया है। इसने हमारी सटीकता और आक्रमण क्षमताओं को बढ़ाया है। हालांकि प्रमुख अभियानों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, लेकिन अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं हैं जो खतरों को उनके वास्तविक रूप लेने से पहले ही बेअसर करने के लिए सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।”

--आईएएनएस

जीसीबी/डीएससी

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