Samachar Nama
×

ऑपरेशन सिंदूर में S-400 का बड़ा खुलासा, 314 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के अंदर उड़ रहे विमान को बनाया निशाना

ऑपरेशन सिंदूर में S-400 का बड़ा खुलासा, 314 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के अंदर उड़ रहे विमान को बनाया निशाना

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के अंदर करीब 314 किलोमीटर दूर उड़ रहे एक विमान को निशाना बनाकर मार गिराया था। रक्षा मंत्रालय की ताजा सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट में इस विमान को स्पेशल मिशन एयरक्राफ्ट बताया गया है। हालांकि, भारतीय वायुसेना के अधिकारी पहले यह जानकारी दे चुके हैं कि यह पाकिस्तान का AWACS विमान था। AWACS यानी ऐसा विमान जो आसमान में मौजूद खतरों और टारगेट पर नजर रखने के साथ-साथ हवा में ही एक तरह के कमांड सेंटर की भूमिका निभाता है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह भारत की तरफ से सतह से हवा में किया गया अब तक का सबसे लंबी दूरी का हमला था। इस कार्रवाई ने यह भी दिखाया कि दुश्मन का विमान अगर भारतीय सीमा से काफी दूर भी हो, तो दूरी उसे भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम से सुरक्षित नहीं रख सकती।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।

7 से 10 मई के बीच भारतीय सेना ने मिसाइल और ड्रोन के जरिए कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई के दौरान भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने भी अहम भूमिका निभाई।

314 किलोमीटर दूर से कैसे बना निशाना?

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, S-400 सिस्टम ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद विमान के खतरे को ट्रैक किया। इसके बाद लंबी दूरी तक मार करने वाली जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल को टारगेट की ओर गाइड किया गया।

इस पूरी कार्रवाई की सबसे खास बात इसकी दूरी थी। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने करीब 314 किलोमीटर दूर मौजूद टारगेट को निशाना बनाया।

इससे S-400 की लंबी दूरी की निगरानी और टारगेट को इंटरसेप्ट करने की क्षमता सामने आई।

पाकिस्तान पर एयरस्पेस खुला रखने का आरोप

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में भारत ने यह भी आरोप लगाया कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने अपना नागरिक एयरस्पेस पूरी तरह बंद नहीं किया था और वहां सिविल फ्लाइट्स का संचालन जारी रहा।

ऐसे माहौल में भारतीय एयर डिफेंस के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी थी कि सैन्य और नागरिक विमानों के बीच अंतर किया जाए।

भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की तरफ से तनाव कम करने और आगे टकराव रोकने की अपील किए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।

भारत की रणनीति को रिपोर्ट में सैन्य ताकत के जरिए दबाव बनाने वाली रणनीति के तौर पर बताया गया है। यानी इतनी मजबूत सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करना कि सामने वाला देश अपनी कार्रवाई रोकने या अपना रुख बदलने के लिए मजबूर हो।

IACCS ने संभाला पूरा एयर डिफेंस नेटवर्क

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के एयर डिफेंस नेटवर्क को IACCS यानी Integrated Air Command and Control System के जरिए कोऑर्डिनेट किया गया।

इस सिस्टम ने सैन्य और नागरिक रडार से मिलने वाली जानकारियों को एक साथ जोड़ने में मदद की। इससे आसमान में मौजूद अलग-अलग विमानों और दूसरे संभावित खतरों की पहचान करना आसान हुआ।

यानी एक तरफ S-400 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम टारगेट पर नजर रख रहे थे, वहीं दूसरी तरफ IACCS पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क को जानकारी उपलब्ध कराने और उसे कोऑर्डिनेट करने में मदद कर रहा था।

इस नेटवर्क और प्रशिक्षित अधिकारियों की मदद से सैन्य विमान और सिविल एयरक्राफ्ट के बीच अंतर करने की क्षमता भी बेहतर हुई, जिससे किसी नागरिक विमान को गलती से निशाना बनाए जाने का खतरा कम हुआ।

S-400 आखिर कितना ताकतवर है?

अब बात करते हैं उस सिस्टम की जिसने इस पूरे ऑपरेशन में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है।

S-400 ट्रायम्फ रूस में विकसित किया गया एक एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे अलग-अलग तरह के हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह सिस्टम फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन जैसे विभिन्न हवाई खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है।

यही वजह है कि S-400 को भारत की एयर डिफेंस क्षमता की एक महत्वपूर्ण परत माना जाता है।

भारत में कहां तैनात हैं S-400?

भारत ने रूस से S-400 की कई स्क्वाड्रन हासिल की हैं, जिन्हें रणनीतिक रूप से अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया है।

पहली स्क्वाड्रन 2021 में भारत को मिली थी और इसे पश्चिमी सीमा से आने वाले संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए तैनात किया गया।

दूसरी स्क्वाड्रन चीन से लगी सीमा के पास तैनात की गई, जहां इसका इस्तेमाल पूर्वी क्षेत्र की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

तीसरी स्क्वाड्रन मिलने के बाद पश्चिमी सीमा पर भारत की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत हुई।

यानी भारत ने S-400 को सिर्फ एक जगह पर तैनात करने के बजाय अलग-अलग रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसकी तैनाती की है।

ऑपरेशन सिंदूर में सामने आई एयर डिफेंस की ताकत

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में सामने आई यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 314 किलोमीटर की दूरी से टारगेट को निशाना बनाने का दावा भारतीय एयर डिफेंस की लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर में मिसाइल, ड्रोन, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और कमांड नेटवर्क ने मिलकर काम किया।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ होती है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ सीमा पर आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं है। अब लंबी दूरी के सेंसर, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम युद्ध की दिशा बदलने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय एयर डिफेंस ने इसी बदलते युद्ध के एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू की झलक दिखाई।

Share this story

Tags