मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष का जोरदार हंगामा, वीडियो में जाने लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही 6 बार स्थगित; जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल पेश
संसद के मानसून सत्र का पहला दिन सोमवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। दिनभर में दोनों सदनों की कार्यवाही कुल छह बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी दल नीट पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। इस दौरान कुछ सांसद पोस्टर और बैनर लेकर सदन के भीतर पहुंच गए, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
विपक्ष ने उठाए कई अहम मुद्दे
सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष सरकार पर हमलावर नजर आया। विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक मामले और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। हंगामे के चलते कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई और पीठासीन अधिकारियों को बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
राज्यसभा में खड़गे ने जंतर-मंतर घटना उठाई
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवा और बच्चे एकत्र हुए थे, लेकिन उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार का दमन किया गया। उन्होंने इस पूरे मामले पर सदन में चर्चा कराने की मांग भी की।
हंगामे के बीच सरकार ने पेश किया अहम विधेयक
सदन में जारी शोर-शराबे के बीच केंद्र सरकार ने अपना विधायी कामकाज भी जारी रखा। लोकसभा में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक पेश किया। सरकार का कहना है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
पीएम मोदी ने सर्वदलीय सहयोग की अपील की
संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर के हंस द्वार पर मीडिया को करीब 15 मिनट तक संबोधित किया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सकारात्मक और सार्थक चर्चा की अपील की।प्रधानमंत्री ने कहा, "मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं। संसद में तर्क, तथ्य और स्वस्थ बहस के साथ चर्चा होनी चाहिए।" उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल जनहित के मुद्दों पर रचनात्मक सहयोग करेंगे और संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में योगदान देंगे।
पहले ही दिन नहीं चल सका सदन
मानसून सत्र के पहले दिन ही लगातार हंगामे के कारण सदन में सामान्य कामकाज प्रभावित रहा। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर कायम दिखा, जबकि सरकार ने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश की। ऐसे में आने वाले दिनों में भी संसद में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

