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ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स के लिए भारत के विजन को आईओसी से पहचान मिलने पर सम्मानित महसूस कर रहे हैं: पी. टी. उषा

ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स के लिए भारत के विजन को आईओसी से पहचान मिलने पर सम्मानित महसूस कर रहे हैं: पी. टी. उषा
ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स के लिए भारत के विजन को आईओसी से पहचान मिलने पर सम्मानित महसूस कर रहे हैं: पी. टी. उषा

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स की मेजबानी की भारत की उम्मीद एक कदम आगे बढ़ी है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की उस घोषणा का स्वागत किया है, जिसमें भविष्य के होस्ट चुनने की प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले शहरों और देशों के बारे में बताया गया है।

गुजरात के अहमदाबाद पर केंद्रित, भारत की बोली आईओसी के साथ सलाह-मशविरा करके बनाई जा रही है, जिसका विजन 'एक साथ उठना' थीम पर आधारित है।

आईओए ने कहा कि यह विजन भारत की खेल संबंधी उम्मीदों को ओलंपिक मूवमेंट के दुनिया भर में अपनी पहुंच बढ़ाने के लक्ष्य के साथ जोड़ना चाहता है। प्रस्तावित गेम्स को सिर्फ एक बड़े खेल इवेंट के तौर पर नहीं, बल्कि भारत में खेलों में बड़े बदलाव के लिए एक कैटलिस्ट के तौर पर देखा जा रहा है।

आईओए के मुताबिक, गेम्स को होस्ट करने से खेलों में, खासकर युवाओं के बीच, ज्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने का मौका मिलेगा, साथ ही यह ज्यादा सेहतमंद और ज्यादा सक्रिय समुदायों में योगदान देगा। इस उम्मीद में यह भी सोचा गया है कि खेल शिक्षा और पेशेवर मौके पैदा करने में एक बड़ी भूमिका निभाएंगे। साथ ही, भारत का मानना है कि ओलंपिक और पैरालंपिक को होस्ट करने से ओलंपिक मूवमेंट को दुनिया की सबसे युवा और सबसे ज्यादा डिजिटली कनेक्टेड आबादी में से एक के साथ जुड़ने का मौका मिलेगा।

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने कहा कि यह इवेंट नए एथलीट्स, दर्शकों और पार्टनर्स को ओलंपिक परिवार में ला सकता है, साथ ही गेम्स को एक अरब से ज्यादा लोगों के लिए खोल सकता है।

आईओए ने कहा कि विजन आखिरकार भारत और ओलंपिक मूवमेंट के लिए एक साझा मौका बनाने के बारे में है, जिसमें गेम्स शायद भारत की सांस्कृतिक विविधता और खेल के जरिए इसके बदलाव का वैश्विक जश्न बन सकते हैं।

आईओए प्रेसिडेंट पी. टी. उषा ने कहा कि संस्थान को आईओसी द्वारा भारत की उम्मीदों को पहचान देने पर गर्व है। उन्होंने जोर दिया कि 'राइजिंग टुगेदर' थीम देश के एथलीट्स, लोगों और शहरों को एक साथ लाने के लिए एक बड़ी प्रतिबद्धता को दिखाता है।

पी. टी. उषा ने कहा, "हम 2036 में ओलंपिक और पैरालंपिक गेम्स के लिए भारत के विजन और उम्मीदों को आईओसी से मिली पहचान से बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं और गेम्स के आने वाले एडिशन के लिए संभावित होस्ट के एक खास ग्रुप का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हमारे लिए, ‘एक साथ आगे बढ़ना’ सिर्फ एक नारा नहीं है—यह एक साझा ओलंपिक सपने के पीछे भारत की ऊर्जा, लक्ष्य और विविधता को एकजुट करने की एक मजबूत प्रतिबद्धता है।"

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे हम 2036 के लिए अपना विजन विकसित कर रहे हैं, हम ऐसे गेम्स बनाना चाहते हैं जो एक युवा, डायनैमिक और उभरते भारत के आत्मविश्वास को दिखाएँ, साथ ही दुनिया भर में नई पीढ़ियों, नए समुदायों और नए क्षितिजों तक पहुंचने के ओलंपिक और पैरालंपिक मूवमेंट के एम्बिशन में योगदान दें। अगर हम अपने एथलीटों, अपने लोगों, अपने शहरों और ओलंपिक और पैरालंपिक मूवमेंट के साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं—तो संभावनाएं असीमित हैं। जब भारत आगे बढ़ता है, तो हम चाहते हैं कि दुनिया हमारे साथ आगे बढ़े। हम आईओसी के साथ अपने एक्सचेंज को जारी रखने और अक्टूबर के आखिर में पहली बार फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने अपने लक्ष्य को पेश करने के लिए उत्सुक हैं।"

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत का 2036 का लक्ष्य, बड़े सामाजिक विकास के लिए खेल को एक जरिया बनाने से जुड़ा है। खेल हमारे देश का भविष्य बनाने में मदद कर सकते हैं। ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी करने से लाखों युवा भारतीयों को खेलों में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी, ज्यादा सेहतमंद और ज्यादा सक्रिय समुदाय मजबूत होंगे, और हमारे युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास में नए मौके बनेंगे।

उन्होंने कहा, "खेलों को भारत में लाकर, हम खेलों में ऐसे बदलाव को तेज कर सकते हैं, जो हमारे समाज के हर हिस्से तक पहुंचे। ऐसा करके, दुनिया के सबसे गतिशील देशों में से एक में ओलंपिक आंदोलन के लिए एक मजबूत नया अध्याय शुरू कर सकते हैं।"

भारत के प्रस्ताव का अगला अहम पड़ाव इस महीने के आखिर में आएगा, जब देश अक्टूबर के आखिर में पहली बार आईओसी के फ्यूचर होस्ट कमीशन के सामने अपना लक्ष्य पेश करेगा।

--आईएएनएस

पीएके

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