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ओडिशा मेट्रो को सीएम माझी की हरी झंडी के संकेत, प्रस्ताव की समीक्षा जारी

भुवनेश्वर, 1 मई (आईएएनएस)। ओडिशा में मेट्रो परियोजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बीजेडी के राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा द्वारा उठाए गए ओडिशा मेट्रो प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि इस प्रस्ताव की जांच और समीक्षा की जा रही है।
ओडिशा मेट्रो को सीएम माझी की हरी झंडी के संकेत, प्रस्ताव की समीक्षा जारी

भुवनेश्वर, 1 मई (आईएएनएस)। ओडिशा में मेट्रो परियोजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। बीजेडी के राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा द्वारा उठाए गए ओडिशा मेट्रो प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि इस प्रस्ताव की जांच और समीक्षा की जा रही है।

दरअसल, डॉ. सस्मित पात्रा ने 6 अप्रैल को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर ओडिशा मेट्रो परियोजना को आगे बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया, जहां आवास एवं शहरी विकास विभाग ने इसे बीएमआरसीएल को “सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई” के लिए अग्रेषित किया है।

इससे पहले डॉ. पात्रा ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर भुवनेश्वर मेट्रो परियोजना को केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी मॉडल पर पुनर्जीवित करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि राजस्थान में जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना को केंद्र सरकार ने 50:50 केंद्र-राज्य विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) मॉडल के तहत मंजूरी दी है, जो ओडिशा के लिए भी एक आदर्श मॉडल हो सकता है।

पात्रा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना 41 किलोमीटर लंबी है और इसकी लागत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि ओडिशा मेट्रो (भुवनेश्वर-कटक-खुर्दा-पुरी) की स्वीकृत लागत 2024 में 6,255 करोड़ रुपये तय की गई थी, जो जयपुर परियोजना की तुलना में आधी से भी कम है।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ओडिशा मेट्रो को जयपुर मॉडल पर लागू किया जाए तो केंद्र और राज्य सरकार लगभग 3,100-3,100 करोड़ रुपये का योगदान कर सकती हैं, जबकि शेष राशि वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) या अन्य वित्तीय साधनों से जुटाई जा सकती है।

डॉ. पात्रा ने कहा कि पुरी-खुर्दा-भुवनेश्वर-कटक कॉरिडोर पर मेट्रो परियोजना लागू होने से लोगों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा मिलेगी। छात्रों और युवाओं को शिक्षा व रोजगार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और छोटे कारोबारों के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार मेट्रो परियोजना को समाप्त करने के फैसले पर पुनर्विचार करे और केंद्र सरकार से चर्चा कर जयपुर मॉडल अपनाए।

गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के साथ हुए समझौते को समाप्त करने का फैसला लिया था, जिससे भुवनेश्वर मेट्रो परियोजना औपचारिक रूप से रद्द हो गई थी। साथ ही भुवनेश्वर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को शहरी परिवहन योजनाओं के लिए नोडल एजेंसी में बदलने का निर्णय भी लिया गया था।

--आईएएनएस

डीएससी

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