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ओडिशा के नेताओं ने संत कवि भीमा भोई की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की

भुवनेश्वर, 15 फरवरी (आईएएनएस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, विधानसभा स्पीकर सुरमा पाढ़ी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ओडिशा विधानसभा परिसर में संत कवि भीमा भोई की पुण्यतिथि पर उनकी मूर्ति पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
ओडिशा के नेताओं ने संत कवि भीमा भोई की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की

भुवनेश्वर, 15 फरवरी (आईएएनएस)। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, विधानसभा स्पीकर सुरमा पाढ़ी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ओडिशा विधानसभा परिसर में संत कवि भीमा भोई की पुण्यतिथि पर उनकी मूर्ति पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर नेताओं ने संत कवि भीमा भोई के जीवन और उनके योगदान को याद किया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, "आज महान संत कवि भीमा भोई का श्रद्धांजलि दिवस है। हमने उनकी मूर्ति पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनका जीवन सरलता, भक्ति और समाज में समानता लाने के लिए समर्पित था। उन्होंने समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया।"

उन्होंने आगे कहा, "भीमा भोई का ज्ञान और भक्ति ओडिशा साहित्य और समाज के लिए अमूल्य धरोहर है। वे न केवल ओडिशा में, बल्कि पूरे देश और दुनिया में प्रसिद्ध हैं। उनका दुख देखकर दुखी होना और उनके द्वारा समाज के पिछड़े वर्गों के उद्धार के लिए की गई प्रार्थनाएं आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।"

यह दिन ओडिशा के सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि संत कवि भीमा भोई ने अपनी कविताओं और भक्ति के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में बड़ा योगदान दिया। उनके कार्यों ने ओडिशा की साहित्यिक धारा को नया मोड़ दिया और समाज में एकता, शांति और समानता की भावना को प्रोत्साहित किया।

पुण्यतिथि के इस अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें लोग बड़े श्रद्धा भाव से भीमा भोई की जयंती मनाते हैं।

बता दें कि संत कवि भीमा भोई एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण व्यक्ति थे। वे इस बात का अनूठा उदाहरण थे कि औपचारिक शिक्षा के बिना भी उच्च कोटि का साहित्य रचा जा सकता है। दृष्टिहीन होने के बावजूद, भीमा भोई में एक अद्वितीय अंतर्दृष्टि थी जिसने उन्हें कई कालजयी छंदों की रचना करने के लिए प्रेरित किया, जो आज भी हर जगह गाए जाते हैं।

भीमा भोई ने समाज में समानता लाने के लिए स्वयं को समर्पित किया और अपने भाषणों, गीतों और कविताओं के माध्यम से महिमा संप्रदाय के दर्शन का प्रसार किया।

--आईएएनएस

एसएके/एएस

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