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न्याय का मतलब सिर्फ अदालत पहुंचना नहीं, आम आदमी को उसके अधिकारों का लाभ दिलाना भी है : सीजेआई

न्याय का मतलब सिर्फ अदालत पहुंचना नहीं, आम आदमी को उसके अधिकारों का लाभ दिलाना भी है : सीजेआई
न्याय का मतलब सिर्फ अदालत पहुंचना नहीं, आम आदमी को उसके अधिकारों का लाभ दिलाना भी है : सीजेआई

देवघर, 2 नवंबर (आईएएनएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को समाज के गरीब और जरूरतमंद तबके तक पहुंचकर उनमें भरोसा पैदा करना होगा। न्याय केवल अदालतों और कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी सुविधा समाज के अंतिम व्यक्ति और उसके घर तक पहुंचनी चाहिए। सीजेआई सोमवार शाम को झारखंड के देवघर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्याय का वास्तविक अर्थ केवल न्यायालय तक पहुंचना नहीं, बल्कि आम नागरिक को उसके अधिकारों का लाभ मिलना है। किसी बुजुर्ग महिला को रुकी हुई पेंशन मिलना, श्रमिक को उसकी मेहनत की मजदूरी मिलना, बच्चे को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलना और पीड़ित परिवार को समय पर सहायता उपलब्ध होना भी न्याय की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है। उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं से जरूरतमंदों तक खुद पहुंचने और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान कराने का आह्वान किया

उन्होंने न्याय व्यवस्था में भरोसा पैदा करने की जरूरत बताते हुए अस्पताल का उदाहरण दिया। सीजेआई ने कहा कि जब कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है तो डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ उसे इलाज का भरोसा दिलाते हैं। इससे मरीज को मानसिक राहत मिलती है और उसकी आधी बीमारी दूर हो जाती है। इसी तरह न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को भी जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। उन्हें सहयोग और मार्गदर्शन देकर यह भरोसा दिलाना चाहिए कि न्याय पाने की प्रक्रिया में वे अकेले नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि न्याय की पहुंच हर गरीब, वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति तक होनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति आर्थिक कमजोरी, अशिक्षा या कानूनी जानकारी के अभाव में न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को अदालतों तक पहुंचने में आने वाली बाधाओं को दूर करना और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। विधिक सेवा से जुड़े संस्थानों को अपनी भूमिका केवल औपचारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखनी चाहिए, बल्कि लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना चाहिए।

उन्होंने झारखंड की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आदिवासी तथा दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से कानूनी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। इस काम में पैरा लीगल वॉलंटियर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि विधिक सहायता का लाभ उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, जो भौगोलिक दूरी और संसाधनों की कमी के कारण संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।

इस अवसर पर सीजेआई ने वर्चुअल माध्यम से पलामू के भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय और रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लीनिकों का उद्घाटन किया। शिविर में विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत कुल 1,880 लाभुकों के बीच 14 करोड़ 46 लाख 90 हजार रुपये की परिसंपत्तियों और सहायता राशि का वितरण किया गया। इसमें पीड़ितों को मुआवजा और सहायता राशि के चेक सहित विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया गया।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने 'मीडिएशन फॉर द नेशन' और 'नालसा वीर परिवार सहायता योजना' सहित विभिन्न जनकल्याणकारी पहलों की सराहना की। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने झारखंड में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण तथा अधिकारों के लिए चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट शिशु' को महत्वपूर्ण बताया।

इससे पहले सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में झारखंड हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय सहित अन्य न्यायिक अधिकारी और प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

--आईएएनएस

एसएनसी/

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