न्यूक्लियर प्रतिबंध बना बड़ी बाधा, ईरान विवाद सुलझने में लग सकते हैं महीनों: प्रफुल बख्शी
नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल बख्शी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सोमवार को कहा कि ईरान पर जिस तरह से प्रतिबंध लगाने की बात कही गई, इस पर ईरान तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि जब तक उनके उठाए मुद्दों का हल नहीं होगा, तब तक बातचीत सफल नहीं होगी।
रक्षा विशेषज्ञ प्रफुल बख्शी ने कहा कि ईरान का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका कंट्रोल रहेगा। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल नहीं रहेगा। न्यूक्लियर प्रतिबंध से ईरान खफा है, लेकिन अगर न्यूक्लियर प्रतिबंध पर बात की जाए तो समाधान निकल सकता है। जल्दबाजी में बातचीत नहीं हो पा रही है। बातचीत के लिए ईरान ने काफी तैयारी की थी। ईरान ने कहा कि बातचीत को लेकर अमेरिका की कोई तैयारी नहीं थी।
प्रफुल बख्शी ने कहा कि अमेरिका को पता है कि ये गेम उनके खिलाफ जा रहा है। अब देखना है कि बातचीत चलेगी या थोड़ा सीजफायर रहेगा। पाकिस्तान की कोशिश है कि इसको निरंतर जारी रखें। मेरे हिसाब से ये फेल होना ही था। अगर कोई समाधान निकलता है तो 6-8 महीने सीजफायर रहेगा, लेकिन कोई माहौल बनेगा तो फिर लड़ाई शुरू हो जाएगी। ईरान और इजरायल के बीच ये ऐतिहासिक लड़ाई है। हालांकि एक वक्त में दोनों में दोस्ती भी थी।
उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कोई इस्लामी देश नहीं है, लेकिन अमेरिका का पलड़ा इसलिए हल्का हो गया है, क्योंकि मध्य पूर्व के देशों ने कह दिया है कि अमेरिका अपने बेस हटा ले। हमारे बेस से ईरान में हमला न करे।
पाकिस्तान की भूमिका पर प्रफुल बख्शी ने कहा कि पाकिस्तान ने लाइमलाइट में रहने के लिए मध्यस्थ की भूमिका अदा की है। अगर मीटिंग बुलानी है तो इस गेम के सभी प्लेयर्स को इकठ्ठा करना पड़ेगा। इजरायल तो हिजबुल्ला पर हमला कर रहा है। ईरान का कहना है कि हिजबुल्ला पर हमला मत करो। ऐसी स्थिति में बातचीत से कोई हल नहीं निकलने वाला है।
भारत को लेकर प्रफुल बख्शी ने कहा कि भारत अपनी पोजीशन मेंटेन रखेगा। भारत न तो ईरान की ओर रहेगा और न ही अमेरिका की तरफ, क्योंकि इजरायल उसका दोस्त है, जिसको अमेरिका सपोर्ट कर रहा है। ईरान से भारत का कमर्शियल एक्टिविटी है और पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं। भारत आग में तेल डालने की बात नहीं करेगा।
--आईएएनएस
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