एनटीए पर लगे प्रतिबंध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे दें : विनोद जाखड़
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधामी दिल्ली में सोमवार को सीजेपी प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज, नीट पेपर लीक विवाद और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आरएमएल अस्पताल दौरे को लेकर एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर जुबानी हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को बलपूर्वक दबाया जा रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
विनोद जाखड़ ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया गया। छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक पर सख्त कानून बनाने और एनटीए जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके खिलाफ बल प्रयोग किया गया। प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, बैरिकेडिंग का इस्तेमाल किया गया, सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी लाठियां चलाईं और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आईं। जाखड़ ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि देश का युवा अब जाग चुका है और धर्म, जाति व संप्रदाय की राजनीति से ऊपर उठकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि नीट पेपर लीक की इस घटना के बाद 25 से अधिक छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की है। एनएसयूआई ने पूरे देश में इस मुद्दे पर आंदोलन चलाया, संगठन के कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और लाठीचार्ज किया गया। सरकार ने छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास किया। राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान का जिक्र करते हुए जाखड़ ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोटा, देहरादून समेत कई स्थानों पर छात्रों से संवाद किया। राहुल गांधी के कार्यक्रम की अनुमति रद्द कर उसी मैदान में मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार छात्रों की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उनका ध्यान भटकाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि एनएसयूआई पूरे देश में लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन कर रही है। विभिन्न राज्यों में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के पुतले फूंके जा रहे हैं, कैंडल मार्च और मशाल मार्च निकाले जा रहे हैं। जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलता और सरकार जवाबदेही तय नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आरएमएल अस्पताल में घायलों से मुलाकात का जिक्र करते हुए जाखड़ ने कहा कि वह देर रात अस्पताल पहुंचे और घायल छात्रों से मिले। कई छात्रों के सिर फटे हुए थे, किसी का कान घायल था तो किसी का पैर टूट गया था। सरकार ने पेपर लीक से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई और न ही किसी प्रकार की सांत्वना दी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा सीजेपी नेताओं से मुलाकात और आरएमएल अस्पताल के दौरे पर पूछे गए सवाल के जवाब में जाखड़ ने कहा कि देश का युवा अब सड़कों पर उतर चुका है और सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर करेगा। राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू किए गए 'छात्रों की गूंज' अभियान से लाखों छात्र जुड़ चुके हैं और 28 राज्यों में यह अभियान चलाया जा रहा है। अब देश का युवा धार्मिक मुद्दों पर नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों के सवाल पर सरकार से जवाब मांग रहा है। उन्होंने मांग की कि एनटीए पर प्रतिबंध लगाया जाए, शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए और प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जाखड़ ने कहा कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, एनएसयूआई का आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी के सवाल पर भी जाखड़ ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों की गाड़ियों और बैगों की पहले से जांच की जा रही थी, मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशन बंद थे, ऐसे में छात्र पत्थर लेकर नहीं आ सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बैरिकेडिंग के पास पहले से वेल्डिंग की गई थी और नुकीले तार लगाए गए थे। पुलिस पहले से पूरी तैयारी के साथ मौजूद थी और उसी ने पत्थरबाजी की स्थिति पैदा की। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए बड़ी संख्या में छात्र एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस कार्यालयों में शरण लेने को मजबूर हुए।
जाखड़ ने आगे कहा कि उनका संगठन छात्रों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा और जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार, एनटीए के खिलाफ कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
--आईएएनएस
पीएसके

