'अब नहीं लगेगा 10 हजार का फटका...' – नोएडा में रेंट एग्रीमेंट कराने वालों को बड़ी राहत, नए नियम से भारी बचत!
अगर आप नोएडा या ग्रेटर नोएडा में किराए पर फ्लैट लेने की योजना बना रहे हैं, तो रेंट एग्रीमेंट से जुड़ा यह अपडेट आपके काम का हो सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने रेंट और लीज एग्रीमेंट पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क की नई दरों को मंजूरी दी है। इसका मकसद किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए एग्रीमेंट बनवाने का खर्च कम करना और पंजीकृत समझौतों को बढ़ावा देना है।
नई दरों के तहत शुल्क मकान के सालाना किराए और एग्रीमेंट की अवधि के आधार पर तय किया जाएगा। हालांकि, किसी भी एग्रीमेंट के लिए वास्तविक खर्च उसकी शर्तों और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए एग्रीमेंट बनवाने से पहले संबंधित पंजीकरण कार्यालय से नई दरों की पुष्टि करना जरूरी है।
रेंट एग्रीमेंट की नई दरें क्या हैं?
दी गई जानकारी के अनुसार, 10 साल तक की अवधि वाले रेंट और लीज एग्रीमेंट के लिए स्टाम्प शुल्क की प्रस्तावित दरें इस प्रकार हैं:
| औसत सालाना किराया | 1 साल तक | 1 साल से अधिक से 5 साल तक | 5 साल से अधिक से 10 साल तक |
|---|---|---|---|
| ₹2 लाख तक | ₹1,000 | ₹2,000 | ₹4,000 |
| ₹2 लाख से अधिक और ₹6 लाख तक | ₹3,000 | ₹6,000 | ₹8,000 |
| ₹6 लाख से अधिक और ₹10 लाख तक | ₹4,500 | ₹10,000 | ₹13,000 |
रिपोर्ट के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन फीस भी स्टाम्प शुल्क के बराबर होगी। यानी अगर किसी एग्रीमेंट पर ₹1,000 स्टाम्प शुल्क लगता है, तो रजिस्ट्रेशन फीस जोड़ने के बाद कुल खर्च ₹2,000 हो सकता है।
ध्यान रखें कि ऊपर दी गई दरों और रजिस्ट्रेशन फीस की गणना को अंतिम मानने से पहले आधिकारिक अधिसूचना और अपने एग्रीमेंट पर लागू नियमों की जांच जरूर करें।
पहले 11 महीने का नोटरी एग्रीमेंट क्यों बनवाते थे लोग?
कई मकान मालिक और किरायेदार स्टाम्प ड्यूटी तथा रजिस्ट्रेशन के खर्च से बचने के लिए 11 महीने का एग्रीमेंट बनवाते रहे हैं। कुछ मामलों में इसके लिए नोटरी का सहारा भी लिया जाता है।
लेकिन नोटरी से सत्यापित एग्रीमेंट और विधिवत पंजीकृत एग्रीमेंट एक ही चीज नहीं हैं। दोनों की कानूनी स्थिति और उपयोग अलग हो सकते हैं। विवाद होने पर एग्रीमेंट की शर्तें और उसका कानूनी स्वरूप महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
नई दरों का उद्देश्य एग्रीमेंट बनवाने की लागत कम करके लोगों को उचित दस्तावेज तैयार कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
₹1.8 लाख सालाना किराए पर कितना खर्च आएगा?
मान लीजिए कि नोएडा में किसी फ्लैट का सालाना किराया ₹1.8 लाख है। दी गई नई दरों के अनुसार, एक साल तक के एग्रीमेंट पर ₹1,000 स्टाम्प शुल्क और ₹1,000 रजिस्ट्रेशन फीस लगती है, तो कुल खर्च ₹2,000 होगा।
यदि इसी एग्रीमेंट पर पहले कुल ₹10,000 खर्च होने का दावा सही हो, तो नई दर पर ₹8,000 की बचत होगी। यह करीब 80 प्रतिशत की कमी है।
हालांकि, पुरानी और नई दरों की तुलना संबंधित आधिकारिक शुल्क सूची से सत्यापित करना जरूरी है। हर एग्रीमेंट में इतनी ही बचत होगी, यह जरूरी नहीं है।
सालाना किराया ₹10 लाख से ज्यादा होने पर क्या होगा?
दी गई जानकारी के मुताबिक, सालाना किराया ₹10 लाख से अधिक होने पर राहत की गणना पहले ₹10 लाख तक के किराए के आधार पर की जा सकती है, जबकि अतिरिक्त हिस्से पर पुरानी दरें लागू होने की बात कही गई है।
टोल और खनन से जुड़े लीज समझौतों को इस छूट से बाहर बताया गया है। ऐसे मामलों में शुल्क की गणना अलग हो सकती है। इसलिए अधिक किराए वाले फ्लैट या व्यावसायिक संपत्ति का एग्रीमेंट बनवाने से पहले संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को क्यों मिलेगी राहत?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में नौकरी करने वाले लोगों, छात्रों और परिवारों की बड़ी संख्या किराए के मकानों में रहती है। फ्लैट लेने के दौरान उन्हें सिक्योरिटी डिपॉजिट, ब्रोकर फीस, शिफ्टिंग और मासिक किराए जैसे कई खर्च उठाने पड़ते हैं।
अगर रेंट एग्रीमेंट की नई दरें लागू होती हैं, तो दस्तावेज बनवाने का शुरुआती खर्च कम हो सकता है। इससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
रेंट एग्रीमेंट में आमतौर पर मासिक किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, रहने की अवधि, किराया बढ़ाने की शर्तें और मकान खाली करने के लिए नोटिस की अवधि दर्ज होती है। विवाद की स्थिति में यही दस्तावेज दोनों पक्षों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने में मदद करता है।
क्या रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
उत्तर प्रदेश किरायेदारी कानून, 2021 के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच लिखित किरायेदारी समझौते तथा संबंधित प्राधिकरण को इसकी जानकारी देने से जुड़े प्रावधान हैं।
वहीं, सामान्य कानूनी नियमों के तहत एक साल से अधिक अवधि के कुछ पट्टा समझौतों का पंजीकरण अनिवार्य होता है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि हर 11 महीने का नोटरी एग्रीमेंट सभी कानूनी जरूरतों को पूरा कर देता है। अपने समझौते की अवधि और प्रकृति के अनुसार लागू नियमों की पुष्टि जरूर करें।
रेंट एग्रीमेंट साइन करने से पहले ये 5 बातें जांचें
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स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस: संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से लागू शुल्क की पुष्टि करें।
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किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट: दोनों की रकम और भुगतान की शर्तें साफ-साफ लिखवाएं।
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मेंटेनेंस और बिल: बिजली, पानी, सोसायटी मेंटेनेंस और मरम्मत का खर्च कौन देगा, यह तय करें।
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नोटिस पीरियड: मकान खाली करने या किरायेदारी समाप्त करने के लिए कितने दिन पहले सूचना देनी होगी, यह दर्ज कराएं।
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भुगतान का रिकॉर्ड: किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट का भुगतान ऐसे माध्यम से करें, जिसका रिकॉर्ड और रसीद उपलब्ध हो।
किरायेदार और मकान मालिक अभी क्या करें?
उत्तर प्रदेश में रेंट और लीज एग्रीमेंट के स्टाम्प शुल्क में बदलाव की खबर से किराए पर रहने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। लेकिन एग्रीमेंट बनवाने से पहले यह जांचना जरूरी है कि नई दरें आधिकारिक रूप से लागू हो चुकी हैं या नहीं और आपके समझौते पर उनका लाभ मिलेगा या नहीं।

