नॉर्वे की कंपनी के साथ पवन हंस का समझौता, भारत में इलेक्ट्रिक सीप्लेन तकनीक की संभावनाओं की तलाश
नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत कार्यरत सरकारी कंपनी पवन हंस लिमिटेड (पीएचएल) ने नॉर्वे की कंपनी नोएमी एयरोस्पेस के साथ एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य इलेक्ट्रिक सीप्लेन सहित अगली पीढ़ी की टिकाऊ विमानन तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाना है।
इस समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा की उपस्थिति में किए गए।
पवन हंस लिमिटेड की ओर से इसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुनील कुमार नागदावने और नोएमी एयरोस्पेस की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक फ्रांस्वा लिथुन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
प्रस्तावित साझेदारी के तहत दोनों पक्ष कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशेंगे, जिसमें इलेक्ट्रिक सीप्लेन तकनीक, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण, तकनीकी ज्ञान साझा करना और कार्यशालाएं आयोजित करना और व्यवहार्यता अध्ययन (फीजिबिलिटी स्टडी) शामिल हैं।
यह पहल भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क, हरित विमानन, नवाचार आधारित विकास, द्वीपीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और उभरती विमानन तकनीकों को बढ़ावा देने की नीति के अनुरूप है।
इस अवसर पर नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यह सहयोग नागरिक उड्डयन क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के भारत के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य केवल भारत में सीप्लेन संचालित करना नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के तहत भारत में सीप्लेन का निर्माण भी करना है।"
राम मोहन नायडू ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत सरकार ने देश में सीप्लेन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार ने सीप्लेन संचालन के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं, नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और हितधारकों को प्रोत्साहित करने के लिए देशभर में प्रदर्शन उड़ानों का भी आयोजन किया है।
नॉर्वे के बर्गेन शहर में मुख्यालय वाली नोएमी एयरोस्पेस अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रिक सीप्लेन तकनीक विकसित कर रही है। कंपनी के विकास कार्यक्रम को नॉर्वे सरकार का वित्तीय सहयोग भी प्राप्त है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता केवल संभावनाओं की खोज के लिए किया गया है। इसमें किसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धता, खरीद, निवेश या विशेष व्यावसायिक व्यवस्था शामिल नहीं है। भविष्य में किसी भी सहयोग के लिए अलग से औपचारिक समझौते और सक्षम प्राधिकारियों की मंजूरी आवश्यक होगी।
पवन हंस लिमिटेड ने कहा कि यह पहल नवाचार, परिचालन उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से भारत के विकसित हो रहे विमानन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
--आईएएनएस
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