Noise Pollution: कितने डेसीबल की आवाज बन सकती है जानलेवा? तेज DJ, पटाखे और लाउडस्पीकर से सेहत को बड़ा खतरा
शादी में बजने वाला तेज DJ, सड़कों पर गाड़ियों का शोर और त्योहारों पर पटाखों की आवाज आम जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लोग अक्सर तेज संगीत का आनंद लेते हैं, लेकिन लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ कानों में घंटी बजने जैसी समस्या और तनाव भी हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में अत्यधिक तीव्र ध्वनि के साथ पैदा होने वाला दबाव शरीर को गंभीर चोट पहुंचा सकता है।
क्या होता है डेसीबल और कितनी आवाज सुरक्षित है?
डेसीबल (dB) आवाज के स्तर को मापने की इकाई है। सामान्य बातचीत की आवाज आमतौर पर करीब 60 डेसीबल होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शोर से होने वाला नुकसान आवाज की तीव्रता के साथ-साथ उसके संपर्क में रहने की अवधि पर भी निर्भर करता है।
कार्यस्थल पर शोर के जोखिम का आकलन करने के लिए 85 डेसीबल को अक्सर आठ घंटे की शिफ्ट में सुनने की सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण सीमा माना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए इस स्तर पर आठ घंटे तक रहना पूरी तरह सुरक्षित है। आवाज जितनी तेज होगी, नुकसान का खतरा उतनी ही तेजी से बढ़ सकता है।
कब बढ़ने लगता है कानों को नुकसान पहुंचने का खतरा?
तेज आवाज के संपर्क में आने से कान के अंदर मौजूद संवेदनशील कोशिकाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर अस्थायी भी हो सकता है और स्थायी भी।
- 85 डेसीबल के आसपास: लंबे समय तक संपर्क रहने पर सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
- 100 डेसीबल के आसपास: सुरक्षित संपर्क अवधि काफी कम हो जाती है। तेज लाउडस्पीकर या मशीनों के पास लंबे समय तक रहना नुकसानदायक हो सकता है।
- 120 डेसीबल के आसपास: आवाज बेहद तेज हो सकती है और कानों में दर्द या असहजता महसूस हो सकती है।
- 140 डेसीबल या उससे अधिक: बंदूक की गोली या बेहद तेज विस्फोट जैसी आवाज अचानक सुनने की क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और कान का पर्दा भी फट सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि नुकसान की वास्तविक सीमा आवाज के स्रोत, दूरी, संपर्क की अवधि और व्यक्ति की संवेदनशीलता पर निर्भर करती है।
कितने डेसीबल पर इंसान की मौत हो सकती है?
इस सवाल का कोई एक निश्चित डेसीबल स्तर नहीं है, जिस पर हर व्यक्ति की मृत्यु हो जाए। केवल आवाज के डेसीबल स्तर के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति की जान चली जाएगी।
अत्यधिक शक्तिशाली विस्फोट से पैदा होने वाली शॉक वेव शरीर के आंतरिक अंगों, फेफड़ों और कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी घटनाओं में चोट की गंभीरता दबाव, दूरी, वातावरण और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है। यहां नुकसान केवल सुनाई देने वाली आवाज से नहीं, बल्कि विस्फोट से पैदा होने वाले अत्यधिक दबाव से भी होता है।
इसलिए 200 या 210 डेसीबल को इंसान की मृत्यु की कोई सार्वभौमिक और निश्चित सीमा बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। अत्यधिक तीव्र ध्वनि और विस्फोट के प्रभावों को एक ही तरह से नहीं समझना चाहिए।
तेज आवाज से बचने के लिए क्या करें?
तेज शोर से बचाव के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:
- DJ, लाउडस्पीकर और तेज संगीत के स्रोत से उचित दूरी बनाए रखें।
- तेज आवाज वाली जगह पर लंबे समय तक रहने से बचें और बीच-बीच में शांत जगह पर जाएं।
- पटाखे या विस्फोट जैसी तेज आवाज के स्रोत के पास खड़े न हों।
- शोर वाले कार्यस्थल पर उचित कान सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें।
- कानों में लगातार घंटी बजने, सुनाई कम देने या दर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

