देश में चीनी की कोई कमी नहीं, कुछ हफ्तों में कम होंगी कीमतें: इस्मा
दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती चिंताओं के बीच इस्मा यानी इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) ने सोमवार को आश्वस्त किया कि भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है और आने वाले कुछ हफ्तों में कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। उद्योग संगठन का कहना है कि हालिया तेजी मुख्य रूप से बाजार की धारणा, सीमित अवधि के आपूर्ति संबंधी अनुमानों और वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम है, न कि वास्तविक कमी का।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि पिछले 15 से 20 दिनों के दौरान चीनी की कीमतों में जो बढ़ोतरी देखी गई है, उसके पीछे कई कारण हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में सट्टेबाजी और घबराहट में की गई खरीदारी से कीमतों को समर्थन मिला। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग और गन्ने में समय से पहले फूल आने के कारण पिछले वर्ष उत्पादन अपेक्षा से कम रहा, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई। वहीं, वैश्विक स्तर पर चीनी की उपलब्धता कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में तेजी आई, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
हालांकि बल्लानी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चीनी सीजन में देश का कुल उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहने का अनुमान है। दक्षिण कर्नाटक और तमिलनाडु में चल रहे विशेष पेराई सीजन के कारण उत्पादन में अतिरिक्त योगदान मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर को समाप्त होने वाले मौजूदा सीजन तक भारत में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रहेगी और बाजार की स्थिति में जल्द सुधार देखने को मिलेगा।
उन्होंने कहा, "कीमतों में पहले से ही नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में इसका प्रभाव खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।"
इसके साथ ही आईएसएमए के प्रेसिडेंट नीरज शिरगांवकर ने भी भरोसा जताया कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आगामी मांग को पूरा करने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि नए सीजन के शुरू होने तक भी देश के पास पर्याप्त स्टॉक रहेगा, जिससे बाजार में आपूर्ति बनी रहेगी।
आईएएनएस से बात करते हुए नीरज शरगांवकर ने कहा, "सीजन शुरू होने तक देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए, इस नजरिए से हमें पूरा भरोसा है कि मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास काफ़ी स्टॉक होगा। सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदमों से, हम बेहतर स्थिति में होंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से किसानों की आय में सुधार हुआ है, पिछले 2-3 दिनों में हमने कुछ सुधार देखा है। हमें उम्मीद है कि अगले 2-3 हफ्तों में, जैसे ही चीनी खुदरा बाजार में पहुंचेगी, हमें बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।"
इससे पहले शिरगाओकर ने कहा, 2025-26 सीजन में 279 लाख टन शुद्ध चीनी उत्पादन का अनुमान है और सीजन के अंत में करीब 35 लाख टन का क्लोजिंग स्टॉक उपलब्ध रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह घरेलू मांग की तुलना में एक मजबूत बफर स्टॉक है और किसी भी प्रकार की आपूर्ति संबंधी चिंता की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, "भारत में चीनी की कोई कमी नहीं है। उत्पादन और भंडारण दोनों ही संतोषजनक स्तर पर हैं। वर्तमान स्थिति मुख्य रूप से त्योहारी सीजन से पहले बाजार में बनी धारणा से जुड़ी हुई है। यह कोई संरचनात्मक आपूर्ति संकट नहीं है।"
इस बीच, आईएसएमए के उपाध्यक्ष माधव बी. श्रीराम ने चीनी की कीमतों के लिए इथेनॉल कार्यक्रम को जिम्मेदार ठहराए जाने पर असहमति जताई। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि जब इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी, तब कुल इथेनॉल आपूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा चीनी उद्योग से आता था। लेकिन अब यह हिस्सा घटकर करीब 28 प्रतिशत रह गया है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार की स्पष्ट नीति है कि सबसे पहली प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं के लिए चीनी उपलब्ध कराना है, दूसरी प्राथमिकता इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और तीसरी प्राथमिकता निर्यात को दी जाती है। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि इथेनॉल उत्पादन के कारण चीनी की कमी हो रही है।
माधव श्रीराम ने कहा, "हमारी चीनी मिलों और गोदामों में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक मौजूद है। जो कमी का माहौल बनाया जा रहा है, वह वास्तविक स्थिति से पूरी तरह मेल नहीं खाता। चीनी उपलब्ध है और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर जल्द दिखाई देगा।"
--आईएएनएस
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