बिहार विकास करेगा कि नहीं, नीतीश ने मिथक तोड़ स्थापित किया कानून का राज: बाबूलाल मरांडी
रांची, 6 मार्च (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन को लेकर कहा कि नीतीश को जितनी भी बधाई दी जाए वो कम है। वास्तव में वह समाज और राज्य के लिए काम करते हैं। अब अपने इस कदम से उन्होंने ये चरितार्थ किया कि सत्ता ही उनके लिए उद्देश्य नहीं है।
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा, नीतीश को मैं पार्लियामेंट से जानता हूं, जब वे भारत सरकार में मंत्री हुआ करते थे। हम भी मंत्री थे। उस समय से और बिहार में मुख्यमंत्री तक की उनकी यात्रा को मैंने देखा है।
हम वर्ष 2000 से पहले के उस बिहार को याद करते हैं, जब आतंक था, उग्रवाद था, कानून व्यवस्था बिगड़ी हुई थी। विकास का काम तो दूर-दूर तक दिखाई नहीं पड़ता था। लगता था कि बिहार कभी सुधरेगा कि नहीं सुधरेगा। कभी विकास करेगा कि नहीं करेगा, लेकिन नीतीश ने उन सारे मिथकों को तोड़ दिया। उन्होंने कानून का राज बिहार में स्थापित किया और लोग बिहार के विकास को देख रहे हैं। उन्होंने बिजली को बिहार ने काफी पहले ठीक कर लिया था।
उन्होंने नीतीश कुमार के काम की तारीफ करते हुए कहा कि लोग बताते हैं कि बिहार में अच्छी-अच्छी सड़कें बन गई हैं। नीतीश ने बिहार को एक नई दिशा दी है। विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि विपक्ष तो बोलेगा ही। बाबूलाल मरांडी ने ने कहा, "जो काम नीतीश कर सकते हैं, जो काम भाजपा कर सकती है, वो काम विपक्ष कर नहीं सकता। इसलिए विपक्ष को लगता है कि उनके सीने में खंजर भोंक दिया गया है।"
पश्चिम बंगाल गवर्नर के इस्तीफे पर ममता बनर्जी के आरोप को लेकर बाबू लाल मरांडी ने कहा कि ये सब तो नॉर्मल प्रक्रिया चलती रहती है। केंद्र सरकार गवर्नर बनाती है, राष्ट्रपति नियुक्त करती हैं। ममता बनर्जी अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति करती हैं, वे अपनी सुविधा के हिसाब से बात करती हैं। इसलिए वे बोल रही हैं।
एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी के विरोध पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि ममता बनर्जी शुरू से ही विरोध कर रही हैं। उनके दर्द और उनकी तकलीफ को हम सब लोग समझ सकते हैं। बांग्लादेश से रोहिंग्या मुसलमान बड़ी तादात में पहले बंगाल में प्रवेश करते हैं। वहां मतदाता सूची में नाम दर्ज करते हैं। वहां राशन कार्ड बनवाते हैं, आधार कार्ड बनवाते हैं। फिर धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में जाते हैं। आज उनकी जो बड़ी संख्या है, उनके नाम कट रहे हैं, नाम हट रहे हैं। इसलिए उनको तकलीफ हो रही है।
आईएएनएस
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