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नाइजर में हथियारबंद दहशतगर्दों की कैद से आठ माह बाद रिहा हुए झारखंड के पांच मजदूर

रांची, 9 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर में सशस्त्र दहशतगर्दों की कैद में पिछले आठ महीनों से फंसे झारखंड के पांच प्रवासी मजदूरों की आखिरकार सकुशल रिहाई हो गई है। झारखंड सरकार के राज्य प्रवासी नियंत्रण केंद्र ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के हवाले से इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।
नाइजर में हथियारबंद दहशतगर्दों की कैद से आठ माह बाद रिहा हुए झारखंड के पांच मजदूर

रांची, 9 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर में सशस्त्र दहशतगर्दों की कैद में पिछले आठ महीनों से फंसे झारखंड के पांच प्रवासी मजदूरों की आखिरकार सकुशल रिहाई हो गई है। झारखंड सरकार के राज्य प्रवासी नियंत्रण केंद्र ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के हवाले से इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।

गिरिडीह जिले के रहने वाले इन मजदूरों की सलामती को लेकर उनके घर-परिवार के लोग लंबे समय से गहरी चिंता और बेचैनी में थे। शुक्रवार शाम जैसे ही रिहाई की खबर गांवों तक पहुंची, परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू निकल गए। बगोदर प्रखंड के दोन्दलो गांव के फलजीत महतो, राजू महतो, संजय महतो, चंद्रिका महतो तथा मुंडरो गांव के उत्तम महतो कल्पतरु ट्रांसमिशन लाइन कंपनी के तहत नाइजर में कार्यरत थे। 25 अप्रैल 2025 को हथियारबंद अपराधियों ने कंपनी साइट से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर तेलाबारी क्षेत्र से इन सभी का अपहरण कर लिया था।

यह घटना एक बड़े सैन्य-संबंधी ऑपरेशन से जुड़ी बताई गई, जिसमें 26 स्थानीय नागरिकों और 12 अन्य देशों के श्रमिकों को भी बंधक बनाया गया था। इसके बाद से ही परिवारों की जिंदगी इंतजार, डर और दुआओं के बीच गुजर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। कंपनी प्रबंधन, स्थानीय गवर्नर कार्यालय, भारतीय दूतावास (नियामी), विदेश मंत्रालय, और प्रोटेक्ट ऑफ इमिग्रेंट्स कार्यालय के बीच लगातार समन्वय बनाया गया।

राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने रिहा किए गए श्रमिकों से दूरभाष पर बातचीत कर उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली है। मेडिकल जांच और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें हवाई मार्ग से झारखंड लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस कठिन दौर में मुख्यमंत्री के निर्देश पर गिरिडीह जिला प्रशासन ने इन परिवारों के आश्रितों को लेबर कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, मनरेगा जॉब कार्ड, आवास एवं पेंशन योजनाओं, ई-श्रम पंजीकरण सहित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा।

साथ ही कंपनी द्वारा मजदूरों के बैंक खातों में वेतन का नियमित भुगतान भी सुनिश्चित कराया गया, ताकि परिवारों की आजीविका पर संकट न आए। इस मामले को लेकर लोकसभा और विधानसभा में भी आवाज उठी थी। क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात कर मजदूरों की सकुशल रिहाई और वतन वापसी के लिए विशेष आग्रह किया था।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीएससी

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