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साइबर ठगों का नया हथकंडा: महू कैंटोनमेंट बोर्ड के फर्जी पर्चेस ऑर्डर से उद्योगपतियों को लगा रहे चूना

साइबर ठगों का नया हथकंडा: महू कैंटोनमेंट बोर्ड के फर्जी पर्चेस ऑर्डर से उद्योगपतियों को लगा रहे चूना

साइबर अपराधियों ने ठगी का एक नया तरीका अपनाते हुए अब उद्योगपतियों और कारोबारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इस बार ठग महू कैंटोनमेंट बोर्ड के नाम से फर्जी पर्चेस ऑर्डर जारी कर व्यापारियों को लाखों रुपये की चपत लगाने की कोशिश कर रहे हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने पुलिस और साइबर एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, साइबर ठग प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के नाम और लेटरहेड का दुरुपयोग कर उद्योगपतियों को ई-मेल, व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों से फर्जी पर्चेस ऑर्डर भेज रहे हैं। दस्तावेज इतने पेशेवर तरीके से तैयार किए जाते हैं कि पहली नजर में वे पूरी तरह असली प्रतीत होते हैं।

ठग पहले कारोबारियों को बड़ी मात्रा में सामान की आपूर्ति का ऑर्डर देते हैं। इसके बाद विश्वास जीतने के लिए एडवांस भुगतान, सिक्योरिटी डिपॉजिट, जीएसटी सत्यापन या परिवहन शुल्क के नाम पर रकम जमा कराने का दबाव बनाते हैं। जैसे ही व्यापारी भुगतान करता है, ठग संपर्क खत्म कर देते हैं और मोबाइल नंबर तथा अन्य माध्यम बंद कर देते हैं।

पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं। जांच एजेंसियां एक मामले की पड़ताल पूरी भी नहीं कर पातीं कि ठग किसी नए नाम और नई पहचान के साथ लोगों को निशाना बनाना शुरू कर देते हैं। यही वजह है कि साइबर अपराध की रफ्तार कई बार जांच प्रक्रिया से भी तेज दिखाई देती है।

प्रशासन ने उद्योगपतियों, व्यापारियों और सप्लायर कंपनियों से अपील की है कि किसी भी सरकारी संस्था से प्राप्त पर्चेस ऑर्डर पर कार्रवाई करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें। संबंधित कार्यालय से संपर्क कर ऑर्डर की सत्यता जांचें और बिना पुष्टि के किसी भी खाते में भुगतान न करें।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों के नाम से आने वाले ई-मेल, मोबाइल नंबर और बैंक खाते की स्वतंत्र रूप से जांच करना बेहद जरूरी है। किसी भी संदिग्ध संदेश, कॉल या भुगतान की मांग मिलने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।

पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि इस तरह की ठगी करने वाले गिरोह की पहचान के लिए तकनीकी जांच की जा रही है। साथ ही लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की अपील की गई है।

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