सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव, वीडियो में जाने मई 2026 से लागू होंगी नई गाइडलाइन्स
केंद्र सरकार ने देश के सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बड़े बदलाव का निर्णय लिया है। शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और सामुदायिक भागीदारी आधारित बनाने के उद्देश्य से मई 2026 से नई गाइडलाइन्स लागू की जाएंगी। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत देश के करीब 15 लाख सरकारी स्कूलों के प्रबंधन ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा।नई व्यवस्था के अनुसार अब स्कूलों का संचालन और निगरानी अधिक सीधे तौर पर अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के हाथों में होगी। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार होगा और जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
इन नए नियमों में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को भी अधिक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत समिति को 30 लाख रुपये तक के निर्माण और विकास कार्य बिना लोक निर्माण विभाग (PWD) की पूर्व मंजूरी के स्वयं कराने की शक्ति दी जाएगी। इससे छोटे-मोटे विकास कार्यों में देरी कम होने और निर्णय प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।शिक्षा मंत्रालय ने इन सुधारों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुरूप अंतिम रूप दिया है। मंत्रालय के अनुसार यह कदम शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सरकार का यह भी मानना है कि इस बदलाव से स्कूल केवल सरकारी संस्थान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि धीरे-धीरे ‘सामुदायिक संपत्ति’ के रूप में विकसित होंगे, जहां अभिभावक, शिक्षक और स्थानीय लोग मिलकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे।शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इस मॉडल को सही तरीके से लागू किया गया तो इससे स्कूलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत हो सकती है और संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वित्तीय अधिकारों के विस्तार के साथ जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी होगा।
इस निर्णय के बाद देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे शिक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसके क्रियान्वयन को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। फिलहाल, केंद्र सरकार की इस नई नीति को शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में देश के लाखों स्कूलों पर पड़ सकता है।

