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नई सरकार बनते ही फिर से सुलगने लगा नेपाल, छात्र राजनीति पर रोक और आम जनता पर आर्थिक बोझ से बढ़ा आक्रोश

काठमांडू, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने नई सरकार को लेकर उत्साह के साथ-साथ अनिश्चितता भी बढ़ा दी है। केपी ओली सरकार के पतन के बाद हुए संसदीय चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की जीत के साथ बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनी, लेकिन गठन के कुछ ही समय के भीतर दो मंत्रियों के इस्तीफे ने स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि युवाओं के समर्थन से बनी यह सरकार क्या जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी और देश की प्रमुख चुनौतियों का समाधान कर सकेगी या नहीं।
नई सरकार बनते ही फिर से सुलगने लगा नेपाल, छात्र राजनीति पर रोक और आम जनता पर आर्थिक बोझ से बढ़ा आक्रोश

काठमांडू, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने नई सरकार को लेकर उत्साह के साथ-साथ अनिश्चितता भी बढ़ा दी है। केपी ओली सरकार के पतन के बाद हुए संसदीय चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की जीत के साथ बालेंद्र शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनी, लेकिन गठन के कुछ ही समय के भीतर दो मंत्रियों के इस्तीफे ने स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि युवाओं के समर्थन से बनी यह सरकार क्या जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी और देश की प्रमुख चुनौतियों का समाधान कर सकेगी या नहीं।

भारतीय समयानुसार 22 अप्रैल को नेपाल के नव नियुक्त गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले के आरोप में अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके अलावा, श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में हटा दिया गया। सुदान गुरुंग को पद से हटाने को लेकर पार्टी की तरफ से भी आवाज उठने लगी, जिसके बाद पीएम बालेंद्र शाह के आदेश पर उन्होंने इस्तीफा दिया।

सितंबर 2025 में नेपाल में तत्कालीन केपी ओली सरकार के खिलाफ जेन-जी ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ था जो देखते ही देखते हिंसक हो गया और तत्कालीन सरकार को सत्ता से हटा दिया गया।

इसके बाद चुनाव के जरिए देश के युवाओं ने बालेंद्र शाह की सरकार को चुना। हालांकि सरकार के बनने के बाद से लेकर अब तक बालेंद्र शाह की सरकार ने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं, जिसकी वजह से देश में राजनीतिक असंतोष पैदा हो गया है।

बालेंद्र शाह की सरकार ने हाल ही में नेपाल-भारत सीमा पर कस्टम ड्यूटी लगाने का ऐलान किया। इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा है। भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 रुपए से अधिक के सामान पर यह कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी। बीते दिन कुछ तस्वीरें सामने आईं, जिसमें सीमा पार कर रहे लोगों के सामान की जांच हो रही थी।

बालेंद्र शाह सरकार के इस फैसले से जनता में भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। द संडे गार्डियन के अनुसार, यह विवाद केवल एक फैसले को लेकर नहीं हो रहा है, बल्कि आर्थिक फैसलों, गवर्नेंस की चिंताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने लोगों की नाराजगी को हवा दी है।

जेन-जी के पसंद की सरकार से लोगों की नाराजगी के पीछे एक और बड़ा कारण सरकार का राजनीतिक पार्टियों से जुड़े स्टूडेंट यूनियन को साइडलाइन करने या उन पर रोक लगाने का कदम भी माना जा रहा है। पीएम बालेंद्र शाह ने शपथ लेने के तुरंत बाद ही छात्र राजनीति पर पूरी तरह से रोक लगाने का फैसला सुना दिया। इस फैसले से यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में पढ़ रहे युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। शाह सरकार के इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें हजारों युवा प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

छात्र नेताओं ने सरकार पर बातचीत करने के बजाय रोक लगाने वाला तरीका अपनाने का आरोप लगाया है। कई प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को वापस लेने और शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट रिप्रजेंटेशन की रक्षा करने की मांग की।

केपी ओली की सरकार के खिलाफ युवाओं ने बालेंद्र शाह का समर्थन इसलिए ही किया था, क्योंकि वह भ्रष्टाचार समेत उन मुद्दों पर बात कर रहे थे, जो देश के आम लोगों की समस्या है, हालांकि हाल के समय में जिस तरह से सरकार के फैसले सामने आए, उसने 35 साल के बालेंद्र शाह के नेतृत्व पर एक सवाल खड़ा कर दिया है।

खासतौर से अगर कस्टम ड्यूटी की बात करें तो नेपाल के सीमावर्ती इलाके में रहने वाले लोगों की राशन, घर का सामान, दवाई और कपड़ों समेत कई मूलभूत सामग्रियों के लिए निर्भरता भारतीय बाजार पर है। ऐसे में इस कस्टम ड्यूटी ने उनकी जेब पर बुरा असर डाला है।

हालात को देखते हुए सवाल फिर वही उठता है कि आखिर बालेंद्र शाह की सरकार लोगों की मुद्दों को समझकर उसका सही हल निकाल पाएगी या एक बार फिर से नेपाल में सितंबर 2025 की कहानी दोहराई जाएगी।

--आईएएनएस

केके/वीसी

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