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नीट पेपर लीक पर कपिल सिब्बल ने सरकार से मांगा जवाब, पूछा- इसका जिम्मेदार कौन?

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। नीट पेपर लीक मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं की बार-बार पुनरावृत्ति हो रही है और इसका जिम्मेदार कौन है? इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
नीट पेपर लीक पर कपिल सिब्बल ने सरकार से मांगा जवाब, पूछा- इसका जिम्मेदार कौन?

नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। नीट पेपर लीक मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं की बार-बार पुनरावृत्ति हो रही है और इसका जिम्मेदार कौन है? इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।

कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर छात्रों के साथ 'मन की बात' करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि आखिर पेपर लीक क्यों हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश 'विकसित भारत' की ओर बढ़ रहा है, तो शिक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 2016, 2021, 2024 और अब 2026 का उदाहरण शामिल है। यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि एक पैटर्न बन चुका है।

सिब्बल ने कहा कि 2019 के बाद से देश में 65 से 70 परीक्षा पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और जांच के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता।

उन्होंने कहा कि नीट जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा में पेपर लीक होना गंभीर मुद्दा है क्योंकि इससे देश के स्वास्थ्य क्षेत्र और भविष्य के डॉक्टरों पर असर पड़ता है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में तत्काल और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कपिल सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि कई राज्यों में जहां बीजेपी की सरकारें हैं, वहां इस तरह के पेपर लीक मामले अधिक सामने आते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं।

उन्होंने कहा कि छात्रों और अभिभावकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कई बार छात्र दोबारा परीक्षा देने की स्थिति में भी नहीं होते, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर अधिक असर पड़ता है।

सिब्बल ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली को सरकार से पूरी तरह अलग कर एक प्रोफेशनल और स्वतंत्र संस्था के तहत चलाया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

उन्होंने कहा कि केवल बयानबाजी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सिस्टम में संरचनात्मक सुधार की जरूरत है। उन्होंने इसे 'सिस्टम की बीमारी' बताते हुए इसे गंभीर सर्जरी की जरूरत बताया।

सिब्बल ने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और ठोस सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी और छात्रों का भविष्य प्रभावित होता रहेगा।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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