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एनडीए के पासिंग आउट परेड में शामिल कैडेट्स बोले-तकनीक और पारंपरिक युद्धकला का मिला प्रशिक्षण

पुणे, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) ने अपने कैडेटों के 150वें बैच की पासिंग आउट परेड का आयोजन किया, जिसमें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। साथ ही दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन भी समारोह में मौजूद थे। परेड में शामिल कैडेट्स ने आईएएनएस से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए।
एनडीए के पासिंग आउट परेड में शामिल कैडेट्स बोले-तकनीक और पारंपरिक युद्धकला का मिला प्रशिक्षण

पुणे, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) ने अपने कैडेटों के 150वें बैच की पासिंग आउट परेड का आयोजन किया, जिसमें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। साथ ही दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन भी समारोह में मौजूद थे। परेड में शामिल कैडेट्स ने आईएएनएस से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की कैडेट राजस्थान की रहने वाली शगुन ने कहा, "मेरी प्रेरणा का एकमात्र स्रोत मेरे पिता थे, मैं उनसे प्रेरित थी। वे सशस्त्र बलों में सेवा जारी नहीं रख सके, इसलिए मैंने उनकी जगह ली। अक्सर हम खुद को सीमित कर लेते हैं और अपनी वास्तविक क्षमता को भी नहीं पहचान पाते। यहां आने के बाद मुझे एहसास हुआ है कि मैं पहले जितना सोचती थी, उससे कहीं अधिक सक्षम हूं।"

जम्मू कश्मीर के साहिल शर्मा ने कहा, "मेरी सेवा सेना में है, लेकिन हमें अभी तक कोई विशिष्ट शाखा आवंटित नहीं की गई है। मुझे पढ़ाई में कम रुचि है और वायु सेना व नौसेना के कैडेटों को बीटेक करना पड़ता है। मुझे शारीरिक गतिविधियों में अधिक रुचि है, इसलिए मैंने सेना को चुना है।"

साहिल शर्मा ने कहा, "जब तकनीक विफल हो जाती है, तो बुनियादी चीजें ही काम आती हैं। तकनीक की प्रगति के साथ, हमें स्कैन ड्रोन जैसी आधुनिक प्रणालियों से भी परिचित कराया गया है, जिन्हें एनडीए में शामिल किया गया है। हालांकि, हमें पारंपरिक युद्ध के बुनियादी सिद्धांतों का भी प्रशिक्षण दिया गया है।"

हरियाणा के झज्जर के रहने वाले रोहित ने कहा, "महिला कैडेटों की कई उपलब्धियां हैं और मैं यह कहना चाहूंगा कि हमें उन्हें कैडेट ही कहना चाहिए, क्योंकि वे भी हमारे बराबर ही अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।"

एक अनय कैडेट रोहित ने कहा, "मेरी पहली प्रेरणा मेरे पिता थे। मेरी दूसरी प्रेरणा मेरा स्कूल राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बैंगलोर रहा, जहां मैंने सैन्य अनुशासन सीखा।"

एनडीए में शामिल होने पर उन्होंने कहा, "इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, यह बिल्कुल असाधारण है। मुझे इसमें बहुत आनंद आ रहा है। यह बहुत अच्छा है, और मैं अपने माता-पिता के चेहरों पर गर्व देख सकता हूं। यह अब तक का सबसे बेहतरीन अनुभव है।"

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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